20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यहां भक्ति की शक्ति से आए भगवान, कैमरी के जगदीश धाम मेले में उमड़ रहे श्रद्धालु

राजस्थान के करौली में कैमरी स्थित जगदीशधाम जन-जन की आस्था का केन्द्र है। शनिवार से शुरू हुए वार्षिक मेले में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई है।

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Amit Purohit

Jan 23, 2023

jagdish_dham.jpg

कैमरी में भगवान जगदीश की प्रतिमा।

चन्द्रशेखर शुक्ला

करौली.नादौती. शनिवार से शुरू हुए जगदीश धाम वार्षिक मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई है। कैमरी में माघ सुदी पंचमी संवत 1735 यानि बसंत पंचमी के दिन भगवान की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा हुई तभी से बसंत पंचमी व आषाढ़ सुदी दौज पर भी भगवान का मेला लगता है। जिसमें बसंत पंचमी के दिन मेले का खासा महत्व है। कुछ ऐतिहासिक तथ्य व किवंदतियों के अनुसार कैमरी गांव के भांजे चन्दनराम जो आगे चल कर भक्त चन्द्रमादास के नाम से पहचाने गए। इनका जन्म गंगापुर उपखण्ड के गांव नांगतलाई में भाद्रपद बुदी पंचमी संवत 1701 में मुरली गुर्जर के घर हुआ। तेरह वर्ष की उम्र में ही भगवान जगन्नाथजी उड़ीसा के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा थी।

बचपन में हीे वे अध्ययन व दीक्षा के लिए गुरू बृजदास की शरण में पहुंच गए। वहां गुरू ने चन्द्रमादास के नाम से इनका नामकरण किया। संवत 1722 में इनका भरतपुर के अंतर्गत जहाजपुर में जमुना देवी से विवाह हुआ। इन्होंने शादी के बाद भी भगवान की भक्ति के साथ पूर्ण ब्रह्मचर्य व्रत का पालन किया।

यह भी पढ़ें:

Shani Gochar 2023: न्याय के देवता शनि तो न्याय ही करेंगे पर आपको क्या करना है, यह जान लीजिए

इस बीच इन्होंने जगदीश भगवान को प्राप्त करने के लिए मन में संकल्प धारण कर जगदीश धाम उड़ीसा के लिए कनक दण्डवत करते हुए प्रस्थान किया। रास्ते में चन्द्रमादास का शरीर बहुत कमजोर हो गया, लेकिन ईश्वर को याद करने और भक्ति से चन्द्रमादास का शरीर ऊर्जावान हो गया और वे जगन्नाथपुरी पहुंचे। वहां उनको भगवान की कृपा से जगन्नाथपुरी जैसी ही तीन मूर्तियां प्राप्त हुई। चन्द्रमादास के माघ सुदी 4 संवत 1735 को कैमरी गांव पहुंचने पर अगले दिन बसंत पंचमी को मूर्तियों की स्थापना हुई। तभी से यहां हर वर्ष मेला भरता है।

कई राज्यों से आते हैं श्रद्धालु:
समय के साथ मेले की व्यवस्थाओं मे निरंतर सुधार व विकास हो रहा है। अटका प्रसादी का भोग लगता है। मंदिर ट्रस्ट की देखरेख में विकास कार्य चल रहे हैं। हर वर्ष बसंत पंचमी पर भगवान जगदीश की रथ यात्रा के साथ छह दिवसीय मेले के दौरान लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम, अटका प्रसादी, घोड़ा-घोड़ी दौड़, भगवान की माला की बोली सहित अनेक धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। मेले में कई राज्यों से श्रद्धालु आते हैं।

यह भी पढ़ें:
खुद कर रहा मजदूरी ताकि पैरों पर खड़े हों छोटे भाई-बहन, अब भाई कर रहा पीएचडी, बहन भी कॉलेज में