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650 घरों से एकत्र कर रहे रोटी-चारा, गायों को अपने हाथ से खिला रहे

Jaipur City: गो माता की सेवा करने की ठानी और घर—घर से गो—ग्रास व हरा चारा लेना शुरू कर दिया। जहां भी गायें मिलती, उन्हें यह गो—ग्रास और हरा चारा खिला देते हैं। इसके साथ ही गाय, कबूतर, स्वान, बिल्ली के बीमार होने की सूचना मिलती तो तुरंत उपचार करवाते हैं।

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650 घरों से एकत्र कर रहे रोटी-चारा, गायों को अपने हाथ से खिला रहे

650 घरों से एकत्र कर रहे रोटी-चारा, गायों को अपने हाथ से खिला रहे

जयपुर। गो माता की सेवा करने की ठानी और घर—घर से गो—ग्रास व हरा चारा लेना शुरू कर दिया। जहां भी गायें मिलती, उन्हें यह गो—ग्रास और हरा चारा खिला देते हैं। गायों की यह अनूठी सेवा मुरलीपुरा निवासी अजय कांत पारीक और मनोज अग्रवाल ने शुरू की। इसके साथ ही गाय, कबूतर, स्वान, बिल्ली के बीमार होने की सूचना मिलती तो तुरंत उपचार करवाते हैं।

अजय कांत पारीक ने बताया कि निराश्रित गायों को सड़क किनारे पॉलीथिन खाते देख, उनकी सेवा करने का प्रण लिया। तीन साल पहले कुछ घरों से गायों के लिए रोटी व चारा लेना शुरू किया, आज मुरलीपुरा क्षेत्र के 650 से अधिक घरों से नियमित रूप से घर—घर जाकर गो—ग्रास व हरा चारा एकत्र कर रहे है। सुबह 6 बजे ठेला लेकर निकल जाते है और 9 बजे तक इन घरों से गो—ग्रास और हरा चारा एकत्र करते हैं। इसके बाद जहां भी गाये मिलती है, उन्हें ये खिला देते हैं। इससे गाये कचरा और पॉलीथिन खाने से बचती है।

घायल जानवरों की सेवा
अजय कांत पारीक और मनोज अग्रवाल मिलकर घायल गाय, कबूतर, स्वान, बिल्ली का उपचार भी कराते हैं। वे बताते हैं कि कोई भी लोग फोन पर गाय, कबूतर आदि के घायल या बीमार होने की सूचना देते हैं, हम उन्हें अस्पताल लेकर जाते हैं और उनका उपचार करवाते हैं। ये लोग सुबह 9 से 10 बजे तक हरिओम जन सेवा समिति के मां अन्नपूर्णा भंडारे में अपनी सेवाएं भी देते हैं।

जरूरतमंदों की भी यूं कर रहे मदद
अजय कांत पारीक ने बताया कि गौ माता और नर सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है। इसी भावना को देखते हुए अपना जीवन इनकी सेवा में लगा दिया। उन्होंने बताया कि गायों को रोटी व चारा खिलाने के अलावा शहर में फटे व गंदे कपड़े पहने लोगों को पकड़े उपलब्ध कराने के साथ ही नंगे पांव घूमने वालों को चप्पल आदि भी उपलब्ध करा रहे हैं। वे जिन लोगों के दाढी व सिर पर लंबे बाल देखकर उनकी कटिंग भी करते हैं। बीमार लोगों को अस्पताल ले जाकर दवाई भी दिलवा रहे हैं।

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