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रणथम्भौर में 3 वर्ष में 13 बाघ-बाघिन लापता: जयपुर में दो तस्करों से मिले 7 बाघ व पेंथर के नख

गिरोह में शामिल दिल्ली के वन्यजीव तस्कर से 19 नख बरामद, बाघों की सुरक्षा पर सवाल : करोड़ों रुपए खर्च, फिर भी आंख मूंद बैठा वन विभाग

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जयपुर. राजस्थान में एक बार फिर बाघों के शिकार का मामला सामने आया है। इस बार सीबीआइ ने दिल्ली वन्यजीव तस्कर परमजीत सिंह को पकड़ा तो अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा हुआ। सीबीआइ ने आरोपी परमजीत सिंह की निशानदेही से जयपुर में छिपकर बैठे तस्कर पिंटर पटेल और अशोक पारेख को गिरफ्तार किया। सीबीआइ ने आरोपी परमजीत से 19 बाघ व पेंथर के नख और जयपुर में आरोपी पिंटर व अशोक से 7 बाघ व पेंथर के नख बरामद किए हैं। तीनों आरोपियों को दिल्ली न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें सीबीआइ को रिमांड पर सौंपा गया है। आरोपियों से नख के संबंध में पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि राजस्थान के रणथम्भौर से गत तीन वर्ष में 13 बाघ व बाघिन लापता हो गए। अभी सरिस्का व रणथम्भौर से एक-एक बाघ लापता चल रहे हैं। मुकंदरा टाइगर रिजर्व में गत वर्ष 5 बाघ लापता हो गए थे। बाद में चार बाघ के शव मिल गए थे और एक बाघ का पता नहीं चल सका। गौर करने वाली बात है कि बाघों की सुरक्षा को लेकर हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। इसके बावजूद लापता बाघों का सुराग नहीं लगाया जा सका। यहां तक की शिकारियों ने ही सरिस्का अभ्यारण्य को बाघ विहिन कर दिया था। तस्करों के पकड़े जाने पर खुलासा होता है कि प्रदेश में बाघों की दहाड़ से गूंज रहे अभ्यारण्यों पर शिकारियों की नजर है। सीबीआइ की पूछताछ में प्रदेश में वन्यजीवों का शिकार करने वाले शिकारी और तस्करों का पता चल सकेगा। वन्यजीव प्र्रेमियों ने सरकार से भी वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की मांग की है।