जन्माष्टमी की तर्ज पर गणेश मंदिर की होगी सुरक्षा : गोविंद देवजी मंदिर में आए 13 संदिग्धों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैमरे से पकड़ा, तस्दीक के बाद छोड़ा
जयपुर. गोविंददेवजी मंदिर में जन्माष्टमी पर्व पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से सुरक्षा व्यवस्था सफल होने के बाद अब पुलिस आयुक्तालय गणेश चतुर्थी पर मोती डूंगरी गणेश मंदिर में होने वाले आयोजन को देखते हुए इस तकनीक को अपनाएगा। पुलिस ने एआई तकनीक के जरिये गोविंददेवजी मंदिर आने वालों में तेरह संदिग्धों को पकड़ा। सभी आरोपियों के खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं था। इन सभी का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड था और पुलिस के सीसीटीवी कैमरे के रिकॉर्ड में तीन हजार अपराधियों की सूची में ये भी शामिल थे। पुलिस आयुक्त बीजू जॉर्ज जोसफ ने बताया कि पूछताछ और तस्दीक के बाद सभी को छोड़ दिया गया।
प्रयोग सफल रहने पर खरीदे जाएंगे कैमरे
पुलिस आयुक्तालय गणेश मंदिर पर इस तकनीक से सुरक्षा व्यवस्था करेगा और प्रयोग सफल होने पर एआई तकनीक वाले कैमरे खरीदे जाएंगे। शहर में जगह-जगह ये कैमरे लगाए जाएंगे। पुलिस ने तीन हजार अपराधियों का डेटा ऐप पर अपलोड कर दिया। चोरी, लूट, हत्या, वसूली और अन्य गंभीर वारदात में शामिल अपराधियों का डेटा तैयार किया जा रहा है। इसमें अपराधी का चेहरा, फिंगर प्रिंट, रेटिना स्कैन सहित अन्य रिकॉर्ड अपलोड किया जाता है। अपराधियों के वाहनों की जानकारी भी अपलोड की जाएगी ताकि वाहनों के मूवमेंट की जानकारी मिल सके। एआई तकनीक आधारित कैमरों को फेस रिकग्निशन ऐप से जोड़कर काम में लिया गया।
ऐसे करता है काम
एआई तकनीक आधारित कैमरे संदिग्ध की फुटेज सीसीटीवी कैमरों से लिए गए (डेटा में अपलोड) फुटेज से मिलान करता है। फुटेज का मिलान नहीं होने पर ग्रीन सिग्नल दिखाता है और मिलान होते ही कुछ पल में ही अलर्ट जारी करता है।
लुटेरों-जेबतराशों पर कड़ी नजरबीजू जॉर्ज जोसफ ने कहा कि गोविंददेवजी मंदिर में तीन प्रवेश द्वार हैं। तीनों ही प्रवेश द्वार पर चेन लुटेरों, मोबाइल-पर्स स्नैचर और जेबतराशों की निगरानी के लिए एआई कैमरों की मदद ली गई। अभी यह देखा जाएगा कि रात्रि के समय कैमरे कैसे काम करते हैं। उन्होंने कहा कि मात्र 30 प्रतिशत चेहरा नजर आए, तब भी ये कैमरे संदिग्ध की पहचान कर लेंगे। चाहे वह मुंह पर मास्क लगाकर आए या फिर काला चश्मा पहनकर आए।