
Jaipur Hotel : आमेर रोड़ होटल व एक अन्य होटल में एक गेट। फोटो पत्रिका
Jaipur Hotel : दिल्ली के होटल में भीषण आग में लोगों के जिंदा जलने की रूह कंपा देने वाली घटना ने जयपुर के होटलों और रेस्टोरेंट की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए है। यहां भी कदम-कदम पर खुले होटल-रेस्टोरेंट में रोजाना ठहरने वाले हजारों सैलानियों की जान हर पल जोखिम में है। हकीकत यह है कि शहर के करीब 80 फीसदी होटल और रेस्टोरेंट बिना फायर एनओसी के संचालित हो रहे हैं। इनमें न आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम है और न ही आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था।
सबसे चौकाने वाली बात यह है कि जयपुर में जिम्मेदार अग्निशमन अधिकारी खुद को बेबस बता रहे है। अधिकारियों के अनुसार, उनके पास ऐसे होटलों को सीज करने का अधिकार तक नहीं है। विभाग केवल नोटिस जारी कर सकता है। ऐसे में नियमों की अनदेखी करने वालों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। अधिकांश फायर एनओसी वही होटल संचालक लेते हैं, जिन्हें होटलों में शराब परोसनी होती है, क्योंकि बिना फायर एनओसी के आबकारी और ट्रेड लाइसेंस नहीं मिलता।
जयपुर शहर में होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, कोचिंग संस्थान, स्कूल, कॉलेज और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स सहित कुल 8476 फायर एनओसी जारी की गई है, जबकि 641 को नोटिस जारी कर रखे हैं।
शहर में रेलवे स्टेशन के साथ सिंधी कैंप, बनीपार्क, एमआई रोड, जालूपुरा, राजापार्क, ट्रांसपोर्ट नगर, मालवीय नगर, आमेर रोड और जगतपुरा में ही 4 हजार से अधिक होटलें हैं। जबकि दिल्ली रोड, सीकर रोड, आगरा रोड और अजमेर रोड पर भी खूब होटलें चल रही हैं। जानकारों के अनुसार, अब बड़ी संख्या में ऐसे होटल खुल रहे हैं, जहां केवल कमरे उपलब्ध कराए जाते हैं और भोजन बाहर से मंगवाया जाता है।
पत्रिका रिपोर्टर ने बुधवार को जयपुर शहर के होटलों में जाकर देखा तो कई जगह अग्निशमन उपकरण तक नहीं मिले।
1- 50 से 100 कमरों वाले होटलों में सिर्फ एक छोटा-सा रास्ता मिला, जबकि आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट) तक नहीं है।
2- अधिकतर होटलों में फायर फाइटिंग सिस्टम ही नहीं है। कुछ होटलों में फायर सिस्टम बंद पड़े हैं।
3- कई होटल तो तंग गलियों में बने हुए हैं।
4- रेलवे स्टेशन के पास फतेहसिंह मार्केट, गोपालबाड़ी और सैन कॉलोनी में छोटी-छोटी जगहों पर 20 से 25 कमरों की चार-चार मंजिला होटलें बना रखी हैं।
5- होटलों के रिसेप्शन और गैलरी में 1-2 अग्निशमन सिलेंडर रखकर खानापूर्ति कर रखी है।
6- होटलों में निकास के लिए भी छोटा-सा रास्ता बना रखा है। इन होटलों में एक साथ 50 से 60 लोगों को ठहराया जा रहा है।
जोन - एनओसी - नोटिस
मालवीय नगर - 1127 - 58
मानसरोवर - 1632 - 55
सांगानेर - 1387 - 17
मुरलीपुरा - 647 - 63
जगतपुरा - 710 - 34
झालाना - 0 - 0
वैशाली नगर - 113 - 49
झोटवाड़ा - 1041 - 0
विद्याधर नगर - 378 - 14
सिविल लाइंस - 772 - 36
किशनपोल - 122 - 53
आदर्श नगर - 247 -29
हवामहल-आमेर - 300 - 233।
शहर में आवासीय परिसरों में भी होटल चल रहे हैं, जहां लोगों को ठहराया जा रहा है। नगर निगम ट्रेड लाइसेंस भी व्यावसायिक भूखंड के होटलों को ही जारी करता है, जो कुछ बड़े होटलों ने ले रखे हैं।
जो होटल व रेस्टोरेंट संचालक फायर एनओसी नहीं लेते हैं, उन्हें नोटिस ही देते हैं। एक बार नोटिस देने पर भी एनओसी नहीं लेते तो दूसरी बार नोटिस देते हैं।
गौतम लाल, मुख्य अग्निशमन अधिकारी पार्ट-1
फायर एनओसी नहीं लेने वालों को नोटिस देते हैं, सीज करने का अधिकार हमारे पास नहीं है। देवेन्द्र मीणा, मुख्य अग्निशमन अधिकारी पार्ट-2
Published on:
04 Jun 2026 01:51 pm
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