Albert Hall Jahan-e-Khusro: जयपुर। पर्यटन विभाग की ओर से दूसरे दिन भी रविवार को अल्बर्ट हॉल पर जहान—ए—खुसरो का आयोजन किया गया। इसमें मुजफ्फर अली के हुमा-द सेलेश्चल बर्ड ‘हुमा’ नृत्य ने दर्शकों का मन मोहा। इसमें आकाशीय पक्षी की कहानी को जीवंत किया गया।
रूमी फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन की शुरुआत ‘हुमा’ से हुई। पौराणिक पक्षी पर आधारित इस बैले नृत्य के माध्यम से असफलता और सफलता के पथ को दिखाया गया। इसमें व्यक्ति को कैसे अहंकार विनाश की ओर ले जाता है और जब जीवन चरम पर होता है तो कैसे विनम्र होना चाहिए, को दर्शाया गया। इसका संगीत मुजफ्फर अली की ओर से रचित था तथा जसलीन कौर मोंगिया और शाहिद नियाज़ी की ओर से इसे प्रस्तुत किया गया। मुराद अली द्वारा इसको आवाज दी गई। ‘हुमा’ शिंजिनी कुलकर्नी और समूह की ओर से उड़ते पक्षी की तरह एक अनूठी संगीतमय प्रस्तुति रही। इसमें नेहा सिंह मिश्रा, मोहित श्रीधर, मयूख भट्टाचार्य और हितेश गंगानी के साथ बैले की कोरियोग्राफी दी।