जयपुर. राजधानी जयपुर में बीते 15 साल पहले आज ही के दिन जयपुर बम धमाकों से पूरे शहर पर दुखों का पहाड़ टूट गया था। धमाके के दौरान कई परिवारों की खुशियां मातम में बदल गई थी। लेकिन शहर की एक संस्था ऐसी है जो हर सुख—दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल देकर एक परिवार की तरह रिश्ते निभा रही है। भले वह शादी हो या राशन या शिक्षा का खर्च हो। पीड़ित परिवारों का कहना है कि न्यायपालिका के फैसले से वह हैरान है। जल्द से जल्द जख्म देने वालों को फांसी की सजा हो।
राजापार्क स्थित सर्व मंगल सेवा समिति ने बीते 15 साल में अब तक हिंदू परिवारों के जान गंवाने वालों की नहीं बल्कि मुस्लिम परिवारों की बेटियों की भी शादी करवाने के साथ ही पूरा खर्च वहन कर साम्पद्रायिक सौहार्द की मिसाल पेश की है। समिति अध्यक्ष रवि नैयर ने बताया कि आज भी सब परिवारों का उनसे जुड़ाव है। एक पिता का फर्ज अदा कर नैयर सहित अन्य पदाधिकारियों ने बेटियों के हाथ पीले करवाए, आज बेटियां परिवार में बेहतर तरीके से जीवन बसर कर रही है। इन बेटियों के भी अब बच्चों के होने के बाद जुड़ाव नैयर से परिवार के सदस्यों की तरह हो गया है। महामंत्री संजीव नारंग, कोषाध्यक्ष हेमेंद्र गुप्ता ने बताया कि सभी पदाधिकारी एक दूसरे के परिवार की हर खुशी में शिरकत करते हैं। समिति ने अब तक वर्ष 2009 से अब तक कुल आठ बेटियों की शादी करवाई। बेटियों के सिर पर से पिता का साया उठ चुका था।

संबंध आज भी घर जैसे
सांगानेरी गेट स्थित पूर्वीमुखी हनुमान जी मंदिर में पूजा अर्चना कर घर लौट रहे चांदपोल बगरूवालों का रास्ता निवासी ताराचंद शर्मा ने अपनी जान धमाकों के दौरान गंवा दी थी। परिवार पर दु:खों के संकट के बीच नैयर ने आर्थिक संबल दिया। इसके बाद चार बेटियों शिवानी, शीतल, स्वाति, शिखा की शादी करवाई। आज सभी बेटियां अच्छे घर में है। इसके साथ ही इन बेटियों के भी छह से लेकर 14 साल तक के बच्चे हो चुके हैं। मानसरोवर निवासी बेटी शीतल शर्मा ने बताया कि परिवार में एक भाई और पांच बहनें हैं। आर्थिक हालात परिवार के सही नहीं थे, ऐसे में समिति के पदाधिकारी संकटमोचन परिवार के बीच आए। राशन से लेकर अन्य खर्च उन्होंने वहन कर सभी बहनों की शादियां करवाई।
शादी करवाना बड़ा काम
आज भी हर पर्व पर खुशियां एक दूसरे के बीच जाकर साझा की जाती है। ताराचंद के बेटे शशांक ने कहा कि शादी करवाना एक बड़ा काम है, खर्च भी काफी होता है। लेकिन यह मदद मेरे परिवार के लिए सबसे बड़ी मदद थी। इसके साथ ही मदद का सिलसिला अब भी समय—समय पर जारी है। उनके साथ आज भी संबंध घर जैसे हैं। उनकी मां भी रक्षाबंधन पर्व साथ मनाती है। गुनाहगारों को सख्त सजा मिले, ताकि परिवार को न्याय मिल सके।

ईदगाह निवासी हनीफ खान शाम को मजदूरी करते समय अपनी जान धमाकों में गंवा चुके थे। परिवार की आर्थिक हालात काफी खराब थे। हनीफ की पत्नी समेत दो बेटियां, एक बेटा हैं। बड़ी बेटी नेहा अंजूम का निगाह करवाया। इसके बाद मदद की। घर बसाने के पूरे सामान भी उपलब्ध करवाए। जल्द छोटी बेटी इकरा अंजूम का निगाह करवाया जाएगा। मूबीना ने कहा कि सरकार ने कमजोर पैरवी की, आंतकवादियों को उनके हवाले करे। सब लोग उन्हें सबक सिखाएंगे।