14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मधुर मिलन समारोह में जुटे संत—महंत

शहर के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर (Govinddevji Temple) में आर्ष संस्कृति दिग्दर्शक ट्रस्ट की ओर से देव दीपावली मधुर मिलन समारोह (dev diwali meeting ceremony) का आयोजन किया गया। इसमें संत-महंतों व मंदिर पुजारियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में गोविंददेवजी मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी, सरस निकुंज के अलबेली माधुरी शरण, घाट के बालाजी के सुदर्शनाचार्य, गढ़ गणेश मंदिर के प्रदीप औचित्य सहित कई संत महंतों का सानिध्य मिला।

less than 1 minute read
Google source verification
मधुर मिलन समारोह में संत-महंतों का सम्मान

मधुर मिलन समारोह में संत-महंतों का सम्मान,मधुर मिलन समारोह में संत-महंतों का सम्मान,मधुर मिलन समारोह में संत-महंतों का सम्मान

मधुर मिलन समारोह में संत-महंतों का सम्मान
- गोविंददेवजी मंदिर में देव दीपावली मधुर मिलन समारोह
- आयोजन में 300 प्रमाण पत्र वितरित किए गए

जयपुर। शहर के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर (Govinddevji Temple) में आर्ष संस्कृति दिग्दर्शक ट्रस्ट की ओर से देव दीपावली मधुर मिलन समारोह (dev diwali meeting ceremony) का आयोजन किया गया। इसमें संत-महंतों व मंदिर पुजारियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में गोविंददेवजी मंदिर महंत अंजन कुमार गोस्वामी, सरस निकुंज के अलबेली माधुरी शरण, घाट के बालाजी के सुदर्शनाचार्य, गढ़ गणेश मंदिर के प्रदीप औचित्य सहित कई संत महंतों का सानिध्य मिला।

आर्ष संस्कृति दिग्दर्शक ट्रस्ट के अध्यक्ष धर्म प्रचारक विजय शंकर पांडे ने बताया कि कोरोना महामारी के दो साल बाद हो रहे आयोजन को लेकर मंदिरों के महंतों और पुजारियों में उत्साह देखने को मिला। स्नेह मिलन समारोह में मंदिरों के महंतों और पुजारियों का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में 300 प्रमाण पत्र बांटे गए, दुपट्टा प्रसाद और राधा गोविंद की फोटो देकर संतों—महंतों का अभिनंदन किया गया। वेदाचार्य डॉ प्रशांत शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में मन्दिर वालों से निवेदन किया गया कि अपने मन्दिर के गर्भगृह की फोटो व मन्दिर की फोटो और मन्दिर का इतिहास लिख कर आर्ष संस्कृति दिग्दर्शक ट्रस्ट को देवें, जिससे मंदिरों का इतिहास लोगों को पता चल सके।
गढ़ गणेश मंदिर के महंत आचार्य प्रदीप औचित्य ने कहा कि सभी मंदिरों को एक साथ संगठन में बनकर रहना चाहिए। महामंडलेश्वर मनोज चतुर्वेदी ने कहा की मंदिरों में सेवा पूजा विधिवत होनी चाहिए, तभी धर्म को और ताकत मिलेगी। घाट के बालाजी के सुरेश मिश्रा ने कहा कि सभी मंदिरों को आपस में मिलजुल कर विकट परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। शुकसंप्रदाय आचार्य बड़े भैया ने कहा कि सभी मंदिरों में धर्म और ज्ञान प्रचार के लिए निशुल्क संस्कृत वेद, कर्मकांड, ज्योतिष की शिक्षा के लिए कक्षाएं आयोजित करनी चाहिए।