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एक स्कैन से सामने आ जाएगी सच्चाई, झूठ छुपा नहीं सकेंगे

जयपुर नगर निगम ग्रेटर में कचरा उठा या नहीं, इसकी निगरानी की दिशा में काम शुरू हो गया है। निगम ने जिस फर्म को डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने का ठेका दिया है, उस फर्म ने मॉनिटरिंग के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन (आरएफआईडी) कार्ड लगाना शुरू कर दिया है।

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जयपुर

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Umesh Sharma

Oct 05, 2022

जयपुर नगर निगम ग्रेटर में कचरा उठा या नहीं, इसकी निगरानी की दिशा में काम शुरू हो गया है। निगम ने जिस फर्म को डोर टू डोर कचरा संग्रहण करने का ठेका दिया है, उस फर्म ने मॉनिटरिंग के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटीफिकेशन (आरएफआईडी) कार्ड लगाना शुरू कर दिया है। इस कार्ड के जरिए निगम प्रशासन को पता चल जाएगा कि संबंधित घर से कचरा उठा या नहीं। फर्म ने मालवीय नगर जोन में 35 और मुरलीपुरा जोन में 10 हजार कार्ड लगाए दिए हैं। नगर निगम की ओर से जारी आदेशों के तहत इस कार्ड को लगाने का के लिए वी-केयर एन्वायर के कर्मचारी घर-घर जाकर बार कोड लगाएंगे। इस बार कोड को लगाने के दौरान वे घर के मालिक का नाम और उसके मोबाइल नंबर की भी जानकारी लेंगे, ताकि उस घर का रिकॉर्ड उस बार कोड के सिस्टम में एड कर सके।

यूं निगरानी रखेगा नगर निगम

इस पूरे सिस्टम में बार कोड की भूमिका अहम रहेगी। कचरा कलेक्ट करने के लिए आने वाले हूपर वाहन का कर्मचारी इस बार कोड को माेबाइल या दूसरी स्कैन डिवाइस से स्कैन करेगा। घर से कचरा कलेक्शन करने के बाद इस डिवाइस को स्कैन करने पर नगर निगम मुख्यालय या किसी अन्य जगह बने कंट्रोल रूम में उसका रिकॉर्ड पहुंचेगा। जिससे यह पता चल जाएगा वाहन कहां-कहां कचरा उठाने गया है और कहां-कहां नहीं।


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यूजर चार्ज की होगी वसूली

यह डिवाइस लगाने के बाद नगर निगम यूजर चार्ज की वसूली करने की तैयारी कर रहा है। राजधानी में प्रदेश सरकार की ओर से यूजर चार्ज की दरें जारी की गई हैं। जिसमें प्रतिमाह कम से कम 50 रुपए और अधिकतम पांच हजार तक की होंगे। इसमें आवासीय घरों से कम शुल्क वसूला जाएगा। जबकि व्यवसायिक गतिविधियों वाली फर्मों जैसे दुकानें, होटल व रेस्टोरेंट आदि का शुल्क अधिक रहेगा।