
जयपुर। नगर निगम ग्रेटर की मेयर सौम्या गुर्जर को सोमवार को ट्रायल कोर्ट ने आरोप मुक्त कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया उपलब्ध पत्रावलियों पर लेशमात्र भी साक्ष्य नहीं है जिससे यह उपधारणा की जाए कि महापौर और पार्षदों ने आपराधिक षड़यंत्र कर घटना को अंजाम दिया हो।
कोर्ट ने महापौर को मारपीट या राजकार्य में बाधा डालने की धाराओं से भी मुक्त कर दिया। वहीं पार्षदों पर मारपीट और राजकार्य में बाधा डालने के आरोप तय किए हैं। अब इन्ही धाराओं में पार्षद अजय सिंह, पारस जैन, शंकर शर्मा और रामकिशोर के खिलाफ मुकदमा चलेगा। नगर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह ने महापौर सहित अन्य पार्षदों के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज करके चालान पेश किया था।
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम 8 जयपुर महानगर प्र्रथम में आरोप तय करने पर फैसला दिया। सुनवाई के दौरान महापौर की ओर से अधिवक्ता नाहर सिंह माहेश्वरी ने कहा कि आयुक्त यज्ञमित्र सिंह और मेयर सौम्या गुर्जर के बीच विवाद हुआ था। इसके बाद आयुक्त ने चार पार्षद अजय सिंह, पारस जैन, शंकर शर्मा और रामकिशोर के खिलाफ धक्का-मुक्की और मारपीट करने का आरोप लगाते हुए ज्योति नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।
एफआइआर में इन पार्षदों के अलावा मेयर सौम्या गुर्जर का नाम नहीं था, लेकिन पुलिस ने सौम्या को भी इसमें शामिल करते हुए कोर्ट में चालान पेश कर दिया। जबकि किसी गवाह ने महापौर का नाम नहीं लिया केवल राजनीतिक दवाब की वजह से महापौर के खिलाफ चालान पेश कर दिया। वहीं राजकीय अधिवक्ता ने कहा कि आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है और ट्रायल के दौरान आरोप साक्ष्य साबित किए जा सकेंगे। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने महापौर सौम्या गुर्जर को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। वहीं पार्षदों को आपराधिक षड़यंत्र की धारा 120 बी से मुक्त करते हुए मारपीट और राजकार्य में बाधा की धाराओं में आरोप तय किए।
Published on:
11 Apr 2022 07:09 pm

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