Jaipur Literature Festival 2023 – साहित्यकार चित्रा बनर्जी का कहना है कि स्टोरी राइटर को कंट्रोल करती है ना कि राइटर स्टोरी को कंट्रोल करता है। ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल’ के चौथे दिन फ्रंट लॉन में अपनी बुक ‘इंडिपेंडेस’ पर आंचल मलहोत्रा के साथ चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि स्वतंत्रता के समय पर लिखना जरूरी है, उस समय को याद रखना जरूरी है। उस समय लोगों ने क्या कुछ अनुभव और महसूस किया था यह शायद हम भूल गए हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह बुक दो स्तर पर लिखी है एक तरफ उस समय देश में क्या चल रहा था वहीं दूसरी तरफ आमजन क्या कुछ महसूस कर रहे थे। इस किताब में तीन बहनों की कहानी उनके सपनों के बारे में बताया गया है।
जब चित्रा से पूछा गया कि आपकी सभी किताबें विमन ओरियंटेड होती हैं तो उनका कहना था कि पार्टीशन के समय जो कुछ हुआ वो सब जानते हैं लेकिन महिलाओं ने क्या कुछ अनुभव किया इस बारे में बात नहीं होती इसलिए मैने यह बुक लिखने के बारे में सोचा। मेरा मानना है कि हर औरत अपने आप में एक्स्ट्रा आर्डिनरी होती है वो अपनी जिंदगी में प्यार,रिश्ते और अपनापन सब चाहती है, लेकिन सभी को ये सब नहीं मिलता, उसकी आजादी पर रोक लगाई जाती हैए। मेरी कहानी के बैकड्रॉप में तीन बहनों और 1947 के विभाजन से जुड़े हुए अनुभव की एक मार्मिक कहानी है। राष्ट्रीय उथल.पुथल की पृष्ठभूमि में भीषण पारिवारिक गाथा है।
जब उनसे पूछा गया कि इस बुक के लिए उन्होंने क्या रिसर्च की है तो उनका कहना था कि कई बार मुझे लगा की रिसर्च न कंरू लेकिन मैंने उस समय पर लिखी गई बुक्स को पढ़ा। वहीं हिस्टोरिकल फिक्शन लिखने को लेकर उनका कहना था कि इसके लिए हम उस समय को फील करना होगा अन्यथा हम इसे नहीं लिख सकेंगे। मुझे लगता है कि इसे लिखा जाना इसलिए भी जरूरी था क्योंकि उस समय देश के अन्य भागों पर लिखने के लिए लेखक थे लेकिन बंगाल के बॉर्डर पर क्या हो रहा था इसे बताने की जरूरत है। इंडिपेंडेंस की खुशी को नकारा नहीं जा सकता लोगों ने मिल कर ब्रिटिश के खिलाफ लड़ाई लड़ी लेकिन पार्टीशन के दर्द को नकारा नहीं जा सकता। हमें इस बात को समझना होगा।.