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Jaipur Metro Train : क्या है छोटी चौपड़-बड़ी चौपड़ का ‘Island Pattern’, जानिए

- छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशनों के प्लेटफार्म का आइलैण्ड पैटर्न पर हुआ है डिजाइन

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जयपुर

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Pawan kumar

Nov 20, 2019

metro train

gwalior me chalegi metro train

जयपुर। जयपुर मेट्रो रेल के मानसरोवर से बड़ी चौपड़ तक 3 मेट्रो स्टेशन भूतिगत बने हैं। ये तीनों स्टेशन दो अलग—अलग डिजाइन में बने हैं। नवनिर्मित छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन की डिजाइन चांदपोल से अलग है। नए बने छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन विदेशों की तर्ज पर आइलैण्ड पैटर्न पर बनाए गए हैं।

आइलैण्ड पैटर्न में एक प्लेटफार्म
जानकारी के अनुसार आइलैण्ड पैटर्न प्लेटफार्म एक द्वीप के आकार में होता है। इस पैटर्न में यात्री बीच में बने प्लेटफॉर्म पर खड़े रहते हैं। जबकि प्लेटफॉर्म के दोनों तरफ रेलवे ट्रेक बने होते हैं। आइलैण्ड पैटर्न प्लेटफार्म के एक तरफ के ट्रेक पर ट्रेन आती है, तो दूसरी साइड के रेलवे ट्रेक से होकर ट्रेन जाती है। यानी कि छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ भूमिगत मेट्रो स्टेशन पर आने और जाने वाले दोनों ही तरफ के यात्री एक ही प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे। जयपुर मेट्रो ने दोनों ही मेट्रो स्टेशनों को आइलैण्ड पैटर्न के हिसाब से बनाया है।

इसलिए चुना आइलैण्ड पैटर्न
जयपुर मेट्रो इंजीनियर्स ने बताया कि छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ पर चांदपोल की बजाय चौड़ाई कम है। इसलिए छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ पर आइलैण्ड पैटर्न से स्टेशन बनेंगे। छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन की लम्बाई 250 मीटर और चौड़ाई 24 मीटर है। दोनों स्टेशनों के की चौड़ाई 24 मीटर होने के कारण यहां पर आइलैण्ड पैटर्न प्लेटफार्म बनाए गए हैं। आइलैण्ड पैटर्न प्लेटफार्म बनाने में लागत भी कम आती है और मेट्रो का संचालन भी बेहतर ढंग से होता है। सिंगापुर सहित विदेशों में आइलैण्ड पैटर्न पर ज्यादातर मेट्रो प्लेटफॉर्म बने हुए हैं। इसे देखते हुए जयपुर में भी यही मॉडल अपनाया गया है।

चांदपोल में बने हैं दो प्लेटफार्म
जबकि चांदपोल मेट्रो स्टेशन में आने—जाने के लिए अलग—अलग प्लेटफार्म बने हुए हैं, जो रेलवे की परम्परागत शैली है। चांदपोल मेट्रो स्टेशन पर रेलवे ट्रेक के दोनों तरफ 2 प्लेटफार्म बने हुए हैं। मानसरोवर से चांदपोल आने वाले यात्री एक साइड के प्लेटफॉर्म पर उतरते हैं। तो चांदपोल से मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को दूसरे प्लेटफार्म से ट्रेन पकड़नी होती है। भारत में ज्यादातर प्लेटफार्म रेलवे ट्रेक के दोनों तरफ बने होते हैं। छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशनों के लिए नए पैटर्न को चुना गया है।