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मेट्रो लाइट प्रोजेक्ट से शहर को आस, दो सौ फीट बायपास से अल्बर्ट हॉल तक रहेगा रूट

पूरे शहर में होगी कनेक्टिविटी, तभी काम आ पाएगी मेट्रो, मेट्रो के साथ-साथ सिटी बसों, फीडर, ई-रिक्शा की कनेक्टिीविटी जरुरी

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जया गुप्ता / जयपुर। हजारों करोड़ रुपए के लागत से बनी मेट्रो फेज 1 (मानसरोवर से चांदपोल तक) शहर के काम अब तक नहीं आ पाया है। शहर में ट्रैफिक भार बढ़ता जा रहा है। जिसे देखते हुए जयपुर मेट्रो प्रशासन ने मेट्रो लाइट चलाने का निर्णय लिया है। लेकिन, पहले फेज की मेट्रो की तरह यह भी शहर के लिए सफेद हाथी न बन जाए, इसके लिए जरुरी है पूरी तैयारी और शहर के ज्यादा से ज्यादा हिस्से को जोडऩा। मेट्रो के अलावा सिटी बस, इलेक्ट्रिक बस, ई-रिक्शा, फीडर, साइकिल शेयरिंग सहित अन्य परिवहन के साधन भी संचालित होंगे, तभी शहर को ट्रैफिक जाम से राहत मिल पाएगी।


मेट्रो लाइट : 17 किलोमीटर का होगा संभावित रूट
मेट्रो लाइट के लागत सामान्य मेट्रो की तुलना में एक तिहाई ही होगी। दो सौ फुट बायपास पर बीआरटीएस कॉरिडोर से शुरू होगी, यहां से बी-टू-बायपास होते हुए जवाहर सर्कल से जेएलएन मार्ग पर आएगी। यहां से अल्बर्ट हॉल तक इसका संचालन किया जा सकेगा। वहीं जवाहर सर्कल से इसे एयरपोर्ट तक भी जोडऩे की तैयारी है। जेएलएन मार्ग पर दोनों ओर एक-एक लेन में यह चल सकेगी। बीआरटीएस कॉरिडोर वर्तमान में काम भी नहीं आ पा रहा है। ऐसे में इस डेडीकेटेड कॉरिडोर मेट्रो लाइट संचालित हो सकेगी।

मेट्रो लाइट के अलावा मेट्रो फेज 1 सी व फेज 1 डी भी प्रस्तावित है। 1 सी में फेज 1 बी का एक्सटेंशन किया जाएगा। यानी की बड़ी चौपड़ से रामगंज, सूरजपोल होते हुए ट्रांसपोर्ट नगर तक रोका जाएगा। फेज 1 सी से शहर में दिल्ली व आगरा रुट से आने वाली बसों की ट्रांसपोर्ट नगर पर ही रोकने में मददगार साबित होगी। ट्रंासपोर्ट नगर पर ही बस स्टैण्ड बने और वहां से लोग मेट्रो के माध्यम से शहर में जाएं। वहीं फेज 1 डी, फेज 1 ए का एक्सटेंशन होगा। यानी की, मानसरोवर मेट्रो स्टेशन से दो सौ फीट बायपास को जोड़ा जाएगा। इससे अजमेर की ओर से आने वाले यात्रियों को शहर में जाने के लिए मेट्रो मिल सकेगी।

अधूरी तैयारी के कारण सफल नहीं हो पाया कोई भी प्रोजेक्ट
राज्य सरकारों ने पिछले 10-15 वर्षों में ट्रैफिक भार नियंत्रित करने के लिए मेट्रो, बीआरटीएस कॉरिडोर जैसे कई प्रोजेक्ट शहर में शुरू किए। शहर की कई सड़कों पर टुकड़ों में बीआरटीएस कॉरिडोर बनाया गया, लेकिन इससे ट्रैफिक में राहत मिलने के बजाए हादसे बढ़ गए। इसी प्रकार मानसरोवर से चांदपोल के बीच नौ किमी की दूरी पर मेट्रो का लाभ भी शहर को नहीं मिल पाया। इन दोनों ही प्रोजेक्ट्स के सफल नहीं हो पाने का कारण हैं अधूरी तैयारी के साथ शुरू होना। दरअसल, न तो बीआरटीएस कॉरिडोर पूरे शहर को कवर पाया और न ही मेट्रो। इस कारण ही लोग इनका उपयोग नहीं कर रहे हैं।