
आईटीबीपी के महानिदेशक संजय अरोड़ा अब दिल्ली पुलिस के कमिश्नर बन गए हैं। दिल्ली पुलिस इनके ही हुक्म की तामील करेगी। संजय अरोड़ा को पुलिस में अपनी तेज तर्रार छवि के लिए जाना जाता है। इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इन्होंने ही चंदन तस्कर वीरप्पन का पीछा कर उसे जंगल तक सिमटने के लिए मजबूर कर दिया था। अरोड़ा को उस कार्यकाल के दौरान बहादुरी के लिए मुख्यमंत्री के वीरता पदक से सम्मानित किया गया था। संजय अरोड़ा जयपुर के मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जयपुर (एमएनआईटी) से इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री ली है। इन्हें अतंरिक्ष सुरक्षा पदक से भी सम्मानित किया गया है।
आईपीएस बनने के बाद तमिलनाडु पुलिस में विभिन्न पदों पर रहे। वह स्पेशल टास्क फोर्स के एसपी रहे हैं। जहां उन्होंने वीरप्पन गिरोह के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता हासिल की थी। अरोड़ा फिलहाल भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक के रूप में तैनात हैं। यह तीसरी बार है जब एजीएमयूटी कैडर के बाहर के किसी अधिकारी को दिल्ली पुलिस का प्रमुख बनाया गया है। इसे मंजूरी भी मिल गई है। 1988 बैच के आईपीएस अरोड़ा सोमवार को कार्यभार संभालेंगे। उन्होंने तमिलनाडु पुलिस एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में भी काम किया है। अगस्त में आईटीबीपी का महानिदेशक (डीजी) नियुक्त किया गया था और उनका कार्यकाल जुलाई 2025 तक है।
संजय को मिला है अंतरिक्ष सुरक्षा पदक
90 के दशक में चरमपंथी संगठन लिटटे का तमिलनाडू में आतंक बढ़ गया था। मुख्यमंत्री पर भी खतरा मंडरा रहा था। ऐसे में एनएसजी की ट्रेनिंग लेने के बाद अरोड़ा ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को सुरक्षा प्रदान करने के लिए विशेष सुरक्षा समूह (एसएसजी) के गठन किया। संजय अरोड़ा को 2004 में सराहनीय सेवा के लिए पुलिस पदक, 2014 में राष्ट्रपति पुलिस पदक, अंतरिक्ष सुरक्षा पदक और संयुक्त राष्ट्र शांति पदक सहित अन्य सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है। 2002 और 2004 के बीच कोयंबटूर के पुलिस आयुक्त रहे और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में भी काम किया है।
Published on:
31 Jul 2022 06:35 pm
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