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पार्किंग: नगर निगम की कमजोर शर्तें दे रही ठेकेदारों को शह, जनता परेशान

Jaipur Nagar Nigam : राजधानी के दोनों नगर-निगम 20 से अधिक जगहों पर पार्किंग स्थल संचालित कर रहे हैं। इतने ही पार्किंग स्थलों के टेंडर की प्रक्रिया पिछले कुछ महीने से चल रही है। लेकिन कमजोर शर्तें ठेकेदारों को शह दे रही हैं। ठेकेदार और निगम की वजह से जनता की परेशानियां बढ़ गई है।

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जयपुर

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Supriya Rani

Mar 04, 2024

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Jaipur News : राजधानी के दोनों नगर-निगम 20 से अधिक जगहों पर पार्किंग स्थल संचालित कर रहे हैं। इतने ही पार्किंग स्थलों के टेंडर की प्रक्रिया पिछले कुछ महीने से चल रही है। लेकिन कमजोर शर्तें ठेकेदारों को शह दे रही हैं। ठेकेदार और निगम की वजह से जनता की परेशानियां बढ़ गई है। निविदा की शर्तें कमजोर होने का फायदा बोलीदाता उठाते हैं। नगर निगम को बोलीदाता के बारे में कुछ भी पता नहीं होता। आधार कार्ड, पैन कार्ड और एक जीएसटी रजिस्ट्रेशन से निगम के टेंडर में भाग ले सकता है। जबकि, अन्य विभागों में हैसियत प्रमाण पत्र से लेकर फर्म का टर्न ओवर और अनुभव प्रमाण पत्र भी लिया जाता है।

विद्याधर नगर और वैशाली नगर में ग्रेटर नगर निगम में नई पार्किंग निर्धारित की, लेकिन स्थानीय व्यापारियों के विरोध के चलते पार्किंग लेने के बाद बोलीदाता नहीं चला पाए। हाल ही ग्रेटर निगम ने विद्याधर नगर में 15 जगहों पर पार्किंग के लिए टेंडर निकाले। इनमें से तीन ही सफल हुए।

1. किशनपोल बाजार में जनवरी, 2023 में पार्किंग का ठेका हुआ। ठेकेदार ने 28 लाख रुपए में ठेका लिया। करीब नौ लाख रुपए जमा करने के बाद ठेकेदार ने अगली किस्त निगम को नहीं दी। जबकि, दिसम्बर तक वो शहरवासियों से वसूली करता रहा। पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद निगम ने रोक लगाई। लेकिन, अब तक ठेकेदार पर कोई एक्शन नहीं लिया।

2. चौड़ा रास्ता में ठेकेदार ने नियमों के विरुद्ध जाकर शहरवासियों से करीब 70 लाख रुपए की वसूली की। पत्रिका में खबर प्रकाशित होने के बाद निगम ने तीन दिन में उक्त राशि जमा कराने के निर्देश दिए, लेकिन दो वर्ष बीत जाने के बाद भी निगम ये राशि नहीं ले पाया है।


पूर्व नगर निगम आयुक्त ओपी गुप्ता का कहना है कि पार्किंग को व्यवस्थित करने की जरूरत है। इसमें भी माफिया पनप गए हैं। जो निगम को राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे हैं, उनको ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए। नियम और शर्तों को भी मजबूत बनाने की जरूरत है। इससे कम और अच्छे लोग निविदा में भाग ले सकेंगे। -,


भाग लेने वाली फर्म ने पिछले पांच वर्ष में काम नहीं छोड़ा हो।

खराब काम की वजह से फर्म टर्मिनेट नहीं हुई हो।

किसी भी सरकारी विभाग ने फर्म को ब्लैकलिस्ट, डीबार नहीं किया हो।

फर्म का पूरे वर्ष में 39 लाख से अधिक का टर्न ओवर होना चाहिए।

फर्म का टर्न ओवर सर्टिफिकेट जरूरी। नहीं देने पर निविदा में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।

निविदा दाता के विरुद्ध पुलिस में कोई मामला दर्ज नहीं हो। इसके लिए 50 रुपए के स्टाम्प पर लिखकर देना होगा।

सरकारी विभाग, निगम, बोर्ड और बैंक में कम से कम तीन वर्ष काम करने का अनुभव जरूरी है।

फर्म को बीते तीन वर्ष में से किसी एक वर्ष में अस्पतालों, सरकारी विभागों, जेडीए, नगर निगम, देवस्थान विभाग आदि में काम किया हो।

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