
नगर निगम चुनाव पर कोरोना की मार, मतदान नहीं पकड़ पाया रफ्तार
जयपुर।
जयपुर की हैरिटेज नगर निगम में गुरुवार को कोरोना के साये में मतदान हुआ। पांच विधानसभा के 100 वार्डों में हुए मतदान पर कोरोना का खौफ साफ तौर पर दिखा और इसके डर के चलते मतदान रफ्तार नहीं पकड़ पाया। यही वजह रही कि शहर में मतदान का प्रतिशत 60 का आंकड़ा भी नहीं छू पाया।
निर्वाचन आयोग, प्रशासन और पुलिस की बात की जाए तो व्यवस्थाएं चाक चौबंद थीं। मतदान स्थल पर बिना मास्क और सेनेटाइज के किसी को प्रवेश नहीं दिया गया। बूथ की संख्या इतनी ज्यादा थी कि कुछ इलाकों को छोड़ दिया जाए तो शहर में ज्यादातर मतदान स्थलों पर कतारें नजर नहीं आई। इसके बाद भी कोरोना के डर की वजह से लोग मतदान देने से कतराते नजर आए। दोपहर में तो शहर के ज्यादातर मतदान स्थल सूने ही नजर आए। आखिरी घंटों में भी मतदान स्थलों पर जिस तरह की भीड़ हमेशा नजर आती थी, वह नदारद रही और ज्यादातर बूथ पर इक्का-दुक्का ही मतदाता नजर आए।
अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों में भी जोश कम
मतदान के मामले में शहर का अल्पसंख्यक इलाका हमेशा से अव्वल रहा है। मगर हैरिटेज के पांचों विधानसभा क्षेत्रों के अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों में जोश कम नजर आया। कुछ ही मौके रहे जब कुछ बूथ पर मतदाताओं की कतारें नजर आई, वरना ज्यादातर जगहों पर लोग आसानी से मत डालकर लौटते नजर आए। भट्टा बस्ती, शास्त्री नगर, रामगंज, चार दरवाजा, घाटगेट सहित सभी अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों में मतदान के दौरान नजर आने वाले भीड़ नदारद रही।
सुबह-शाम को वोट देने पहुंचे लोग
शहर के बूथों पर सुबह और शाम के वक्त मतदाता नजर आए। दोपहर में तो ज्यादातर बूथ खाली रहे। यही वजह रही कि दोपहर 3 बजे तक मतदान 50 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाया। प्राइवेट काम करने वाले ज्यादातर लोगों ने सुबह ही मतदान किया। वहीं कोरोना की वजह से ज्यादा उम्र के लोग भी मतदान से दूरी बनाते दिखे।
गली-मोहल्लों में पहुंचे कार्यकर्ता, वोट कास्ट की अपील
दोपहर 3 बजे तक मतदान धीमा रहा तो दोनों ही राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता गली—मोहल्लों में झुंड बनाकर पहुंचे और लोगों से वोट कास्ट की अपील की। अपील का कुछ असर नजर भी आया और लोग वोट देने के लिए पहुंचे, मगर दोनों पार्टियों को जितने मतदान की उम्मीद थी, उतने वोट नहीं पड़े।
पुलिस ने निकाला पैदल मार्च
मतदान के दौरान पुलिस की व्यवस्था चाक-चौबंद रही। संवेदनशील मतदान केंद्रों में अतिरिक्त फोर्स लगाई गई, वहीं शहर में जगह—जगह पुलिस ने पैदल मार्च भी निकाला, जिसकी वजह से भी मतदान शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। बूथ पर भी पुलिसकर्मियों ने मतदान करने वाले लोगों के अलावा अन्य किसी को भी ठहरने नहीं दिया।
पहले हाथ सेनेटाइज कराए, फिर दी एंट्री
निर्वाचन आयोग ने कोरोना गाइडलाइन की पालना में कोई कसर नहीं छोड़ी। बिना मास्क के किसी भी व्यक्ति को मतदान केंद्र में एंट्री नहीं दी गई। जो मास्क लगाकर नहीं आया, उसे मौके पर ही मास्क उपलब्ध कराया गया। यही नहीं मतदान केंद्रों के एंट्री से पहले ही लोगों के हाथ सेनेटाइज करवाए गए, इसके बाद ही मतदाता को अंदर जाने दिया गया।
बुजुर्गों और दिव्यांगों को उठानी पड़ी परेशानी
इस बार मतदान केंद्रों पर बुजुर्गों और दिव्यांगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई मतदान केंद्रों पर रैम्प नहीं थे तो ज्यादातर पर व्हील चेयर की व्यवस्था नहीं होने की वजह से इस श्रेणी के मतदाता असहाय नजर आए। कई जगहों पर तो कुर्सियों पर बैठाकर मतदाताओं को परिवारजन और अन्य लोगों ने मतदान करवाया।
मतदान केंद्र बदले, लोग होते रहे परेशान
कोरोना की वजह से इस बार निर्वाचन आयोग ने मतदान केंद्रों की संख्या में इजाफा किया है। इस वजह से लोग परेशान होते दिखे। कई लोग अपने पुराने मतदान केंद्रों पर पहुंचे। मगर उनका मतदान केंद्र बदलने की वजह से उन्हें वहां से लौटना पड़ा। हालांकि मतदाताओं को जो पर्चियां दी गई थी, उनमें मतदान स्थल की जानकारी दी गई थी, लेकिन लोग इन्हें बिना पढ़े ही अपने पुराने मतदान स्थल पर पहुंच गए।
त्योहार में चुनाव की रंगत फीकी
दीपावली के त्योहार में महज 15 दिन का वक्त बचा हुआ है। वहीं शादियों का सीजन भी शुरू होने वाला है। ऐसे में इस समय घरों की सफाई के साथ ही रंग—रोगन का काम हो रहा है। एक वजह यह भी है कि कई लोग वोट देने नहीं पहुंच। उधर बाजारों में भी त्योहार के साथ—साथ शादियों की खरीदारी भी शुरू हो गई है। इस वजह से व्यापारी भी वोट से परहेज करते दिखे।
Published on:
29 Oct 2020 08:13 pm
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