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जयपुर: सिग्नल फ्री बनाने के चक्कर में हादसों को न्यौता? जानिए जेडीए के 24 करोड़ी यू-टर्न प्लान की जमीनी हकीकत

जयपुर के न्यू सांगानेर रोड को सिग्नल फ्री बनाने के लिए जेडीए ₹24 करोड़ की लागत से यू-टर्न मॉडल बना रहा है। हालांकि, सड़क की चौड़ाई घटने और ग्रीन बेल्ट टूटने से हादसों का खतरा बढ़ने को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
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Jaipur U-Turn Model

जयपुर का यू-टर्न मोडल (Photo-Patrika)

जयपुर। पहले करोड़ों खर्च कर सड़क बनाई, डिवाइडर सजाए, पौधे लगाए... अब उसी विकास पर बुलडोजर चलाने की तैयारी है। न्यू सांगानेर रोड को सिग्नल फ्री बनाने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) छह नए यू-टर्न विकसित करने जा रहा है, लेकिन प्रस्तावित डिजाइन में सड़क की चौड़ाई घटने और ग्रीन बेल्ट टूटने की आशंका सामने आई है। ट्रैफिक इंजीनियरिंग के जानकारों का कहना है कि दिल्ली में सफल मॉडल अपनाने के बजाय जयपुर में अलग प्रयोग किया जा रहा है, जो दुर्घटनाओं और जाम दोनों की वजह बन सकता है।

बड़ा हिस्सा डिवाइडर और यू-टर्न के निर्माण में

जेडीए न्यू सांगानेर रोड और बी-टू बायपास को सिग्नल फ्री बनाने की कवायद में है और कंसल्टेंसी फर्म की तैयार डिजाइन यदि जमीन पर उतरी तो यू-टर्न के घुमाव पर मैन कैरिज-वे (सीधे जाने वाले वाहनों के लिए मुख्य सड़क) छह मीटर से भी कम रह जाएगा। यानी 16 मीटर चौड़ी सड़क का बड़ा हिस्सा डिवाइडर और यू-टर्न के निर्माण में उपयोग होगा। ऐसे में सीधे जा रहे वाहन चालकों के सामने ग्रीन बेल्ट आ जाएगी।
पहला यू-टर्न मेट्रो ट्रैक से करीब 600 से 800 मीटर दूरी पर प्रस्तावित है। फिलहाल न्यू सांगानेर रोड पर इस्कॉन रोड, पटेल मार्ग, वीटी रोड, मान्यावास रोड, स्वर्ण गार्डन और भृगु पथ पर ट्रैफिक सिग्नल है। प्रस्तावित योजना में ये सभी सिग्नल हटाए जाएंगे।

कनेक्टिविटी को लेकर 8 यू टर्न बनेंगे

4,500 मीटर लंबे न्यू सांगानेर रोड पर छह और बी-टू बायपास पर दो यू-टर्न बनाए जाएंगे। योजना तकनीकी रूप से सफल रही तो मानसरोवर मेट्रो स्टेशन से न्यू सांगानेर होते हुए टोंक रोड और जेएलएन मार्ग तक सीधी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। इस पूरे मार्ग पर केवल बी-टू बायपास और न्यू सांगानेर रोड के जंक्शन पर ही ट्रैफिक सिग्नल रहेगा।

दिल्ली VS जयपुर

एक लेन यू-टर्न के लिए सड़क की चौड़ाई कम की जा रही

दिल्ली: दो लेन सीधे यातायात के लिए
जयपुर: अतिरिक्त संरचनाएं बनाई जा रही हैं

ऑफसेट तकनीक से सुरक्षा 'नोज' विकसित की जा रही है

दिल्ली: कम समय के लिए ट्रैफिक प्रभावित
जयपुर: जाम की आशंका अधिक

दिल्ली का यू-टर्न मॉडल क्यों है खास?

पूरी तरह सिग्नल फ्री रास्ता: मुख्य मार्ग (कैरिजवे) पर सभी वाहनों के लिए बिना किसी रुकावट के पूरी तरह से मुक्त और सीधा रास्ता रहता है।

ऑफ़सेट सुरक्षा व्यवस्था: वाहनों को बीच या बायीं लेन में मोड़ने के लिए स्प्रिंगपोस्ट और क्रैश बैरियर से 'ऑफ़सेट' बनाए जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन सुरक्षित प्रवेश कर सकें।

कट-इन-मीडियन यू-टर्न: सभी श्रेणी के वाहनों की सुरक्षा के लिए डिवाइडर में साधारण कट-इन-मीडियन यू-टर्न और पेडेस्ट्रियन सुरक्षा के लिए जेब्रा क्रॉसिंग दी जाती है।

आंतरिक सड़कों का ट्रैफिक मैनेजमेंट:

  • आंतरिक सड़कों से आने वाले वाहनों के लिए अनिवार्य रूप से बायीं ओर मुड़ना तय होता है।
  • मुख्य मार्ग से आंतरिक सड़कों की ओर जाने वाले वाहनों के लिए भी बायीं ओर का रास्ता पूरी तरह मुक्त रहता है।

दिल्ली से अलग है जयपुर मॉडल

दिल्ली के यू-टर्न मॉडल को समझने के लिए जेडीए की अभियांत्रकी शाखा का एक दल वहां गया था। टीम ने विशेषज्ञों से चर्चा की और यू-टर्न मॉडल का अध्ययन किया। विशेषज्ञों का कहना है कि जयपुर का प्रस्तावित मॉडल दिल्ली से पूरी तरह अलग है और प्रस्तावित बदलावों से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ सकती है।

इस प्रोजेक्ट पर

  • ₹24 करोड़ खर्च होंगे
  • ₹4.5 करोड़ एक पैदल यात्री अंडरपास (पेडेस्ट्रियन अंडरपास) के निर्माण पर खर्च होंगे।
  • ₹2.3 करोड़ एक यू-टर्न विकसित करने पर खर्च होंगे।

ये पैसे गए पानी में

पिछले एक वर्ष से सड़क के विकास का काम चल रहा है। यहां नया डिवाइडर बनाया गया है। साथ ही पौधरोपण कर ग्रीन बेल्ट विकसित की गई है। यदि नया प्रोजेक्ट लागू हुआ तो ग्रीन बेल्ट को नुकसान होगा और हाल ही में बना डिवाइडर भी तोड़ना पड़ेगा।

ट्रैफिक एक्सपर्ट

"जयपुर से जो टीम आई थी, उसे दिल्ली के यू-टर्न मॉडल दिखाए गए थे। जयपुर में यू-टर्न के साथ जो 'नोज' बनाई जा रही है, वह खतरनाक है। इससे हादसे बढ़ सकते हैं। हम दिल्ली में 70 से ज्यादा यू-टर्न विकसित कर चुके हैं और वाहन चालकों को परेशानी नहीं हो रही। चार से छह महीने में 100 और यू-टर्न की योजना है। बदलावों को राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर पढ़ने के बाद मैंने मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, ट्रैफिक पुलिस और जेडीए को पत्र लिखा है।"
-अतुल रणजीत कुमार, गुरु हनुमान सोसाइटी ऑफ भारत

खामी सामने आती है तो समाधान करेंगे

"यू-टर्न बनाने का कार्यादेश जारी कर दिया गया है। इस्कॉन रोड पर पैदल यात्रियों के लिए एक पेडेस्ट्रियन अंडरपास प्रस्तावित है। एक अन्य अंडरपास के लिए स्थान तलाशा जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारी भी स्थल का निरीक्षण करेंगे। यदि तकनीकी खामी सामने आती है तो उसका समाधान होगा। कंसल्टेंसी फर्म ने अभी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपी है। रिपोर्ट मिलने के बाद काम शुरू होगा।"
- मनीष रोतवाल, एक्सईएन, जेडीए