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डोल ग्यारस पर हुआ ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक, गोविन्द नेधारण किया नटवर वेश

jal jhulani ekadashi 2020: छोटी काशी जयपुर में आज शनिवार को जलझूलनी एकादशी भक्ति भाव के साथ मनाई गई। मंदिरों में सुबह ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण करवाई गई। शाम को शालिग्राम जी को पालकी में विराजमान कर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ डोल यात्राएं निकाली गई। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते बड़े मंदिरों में दर्शनार्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया।

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गोविन्ददेवजी मंदिर

गोविन्ददेवजी मंदिर में शालिग्रामजी का पूजन करते।

जयपुर। छोटी काशी जयपुर में आज शनिवार को जलझूलनी एकादशी भक्ति भाव के साथ मनाई गई। मंदिरों में सुबह ठाकुरजी का पंचामृत अभिषेक कर नवीन पोशाक धारण करवाई गई। शाम को शालिग्राम जी को पालकी में विराजमान कर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ डोल यात्राएं निकाली गई। हालांकि कोरोना संक्रमण के चलते बड़े मंदिरों में दर्शनार्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया। सभी कार्यक्रम मंदिर प्रबंधन, महंत और सेवायतों की मौजूदगी में हुए। जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले भक्तों ने एकादशी का उपवास भी रखा। गलता सहित अन्य पवित्र तीर्थ स्थल बंद होने के चलते भक्तों ने घरों में ही गंगाजल डालकर स्नान किया। इसके साथ ही भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना की। शास्त्रानुसार देवशयनी एकादशी के करीब दो महीने बाद जलझूलनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा के दौरान करवट बदलते हैं। इस एकादशी को जलझूलनी, परिवर्तनी, पद्मा एकादशी और डोल ग्यारस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन ठाकुरजी को डोल में विराजमान कर सरोवरों के तट पर ले जाया जाता है और जल विहार करवाया जाता है।

गोविन्ददेवजी मंदिर में महंत अंजनकुमार गोस्वामी के सान्निध्य में शाम को ग्वाल आरती के बाद सालिगरामजी को खाट पर विराजमान कर मंदिर के दक्षिण पश्चिम संकीर्तन के साथ तुलसी मंच तक ले जाया गया। पूजा एवं पंचामृत अभिषेक कर आरती की गई। तुलसी मंच के चार परिक्रमा करवाने के बाद सालिगरामजी खाट पर विराजमान कर मंदिर की एक परिक्रमा करके निज मंदिर में विराजमान करवाया गया। मंदिर के प्रवक्ता मानस गोस्वामी ने बताया कि इस दिन ठाकुर श्रीजी को खास नटवर वेश धारण करवाकर विशेष शृंगार किया गया। दर्शनार्थियों का प्रवेश नहीं दिया गया। आज द्वादशी भी होने से वामन जयंती भी मनाई गई। श्रद्धालुओं को ऑनलाइन दर्शन करवाए गए।


यहां भी सजी जल विहार की झांकियां
झलझूलनी एकादशी पर पानों का दरीबा स्थित सरस निकुंज में पीठाधीश्वर अलबेली माधुरीशरण के सान्निध्य में सुबह ठाकुर राधा सरस बिहारी सरकार का ऋतु पुष्पों से विशेष शृंगार किया गया। शाम को विशेष भोग अर्पित कर महाआरती की गई। चौड़ा रास्ता स्थित राधा दामोदर, मदन गोपालजी, पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथजी, चांदनी चौक स्थित देवस्थान विभाग के ब्रजनिधिजी मंदिर, आंनद कृष्ण बिहारीजी, रामगंज बाजार स्थित लाड़लीजी मंदिर में जल विहार की झांकियां सजाई गई। सांकेतिक रूप से डोल यात्रा निकाली गई।