
राजस्थान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल के गलियारों में रविवार को एक ऐसी खबर आई, जिसने हर किसी को स्तब्ध करके रख दिया। दरअसल, जिस वरिष्ठ डॉक्टर की 'बेस्ट सर्जरी' की चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही थी, उनकी कामयाबी का जश्न अभी ठीक से मना भी नहीं था कि विधाता ने एक क्रूर मजाक कर दिया। एसएमएस अस्पताल के सीनियर जनरल सर्जन और एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया (ASI) राजस्थान के अध्यक्ष डॉ. बी.एल. यादव का कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया।
चिकित्सा जगत में शनिवार और रविवार का दिन दो बिल्कुल विपरीत भावनाओं का साक्षी बना। एक ओर जहां सवाई मानसिंह अस्पताल के सर्जरी विभाग ने 18 वर्षीय युवती के पेट से 10 किलोग्राम की जटिल गांठ निकालकर इतिहास रचा था, वहीं इस टीम के मुख्य आधार स्तंभ रहे डॉ. बी.एल. यादव अगले ही दिन इस दुनिया को हमेशा-हमेशा के लिए छोड़कर चले गए।
डॉ. बी.एल. यादव और डॉ. शालू गुप्ता की टीम ने हाल ही में एक ऐसी सर्जरी को अंजाम दिया था, जिसे चिकित्सा विज्ञान में बेहद जटिल माना जाता है। दरअसल, 18 साल की एक युवती, जो पिछले 6 महीनों से असहनीय दर्द और पेट में बढ़ती गांठ से परेशान थी, उसके लिए डॉ. यादव मसीहा बनकर आए।
जांच में पता चला कि 10 किलो वजनी गांठ युवती के लिवर, किडनी और पेट की मुख्य धमनी से बुरी तरह चिपकी हुई थी। डॉ. यादव के नेतृत्व में डॉ. शालू गुप्ता, डॉ. हेमलता और अन्य सहयोगियों ने कई घंटों की मशक्कत के बाद इस गांठ को सफलतापूर्वक शरीर से अलग कर दिया। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी भी दी जा चुकी है।
कुदरत का खेल देखिए, डॉ. बी.एल. यादव की इस शानदार सर्जरी की खबर रविवार को ही मीडिया में सुर्ख़ियों में थी। 'पत्रिका' ने भी सोशल मीडिया पर उनकी इस उपलब्धि की प्रशंसा करते हुए पोस्ट की थी। लेकिन, जैसे ही दुनिया उनकी कामयाबी की चर्चा कर रही थी, महाराष्ट्र के गोंदिया से एक दुखद खबर आई। डॉ. यादव वहां सर्जन्स की एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने गए थे, जहां उन्हें अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ। उनके साथियों ने उन्हें सीपीआर और आपातकालीन उपचार देने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
डॉ. बी.एल. यादव सिर्फ एक सर्जन ही नहीं थे, बल्कि राजस्थान में डॉक्टरों के मार्गदर्शक भी थे। करीब 6 माह पहले ही वे 'एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया' (ASI) के राजस्थान चैप्टर के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे। पूरे प्रदेश में उनके सम्मान का आलम यह था कि उनके सामने किसी ने नामांकन तक नहीं भरा। वे एसएमएस मेडिकल कॉलेज में जनरल सर्जरी के सीनियर प्रोफेसर होने के साथ-साथ ट्रोमा सेंटर के नोडल ऑफिसर का जिम्मा भी बखूबी संभाल रहे थे।
डॉ. यादव के आकस्मिक निधन की खबर मिलते ही एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी सहित पूरे चिकित्सा महकमे में शोक छा गया। सहकर्मी डॉक्टरों का कहना है कि वे हमेशा ऊर्जा से भरे रहते थे और जटिल से जटिल केस को मुस्कुराते हुए हल करते थे। हाल ही में जिस तरह से उन्होंने एक 18 साल की युवती की जान बचाई, वो उनकी विशेषज्ञता का अंतिम प्रमाण बन गई।
Published on:
01 Feb 2026 04:36 pm
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