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वायु का रुख देख कर बताएंगे प्रदेश में कैसा रहेगा बारिश का योग

vayu dharini purnima 2020: प्राचीन वेधशाला जंतर-मंतर ( jantar mantar ) के सम्राट यंत्र पर शनिवार को वायु धारिणी पूर्णिमा पर सूर्यास्त के समय 7.20 बजे ध्वज पताका फहरा कर वायु परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान ज्योतिषशास्त्री वायु का रुख देख कर सौ किलोमीटर की परिधि में वर्षा के पूर्वानुमान की भविष्यवाणी भी करेंगे। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते इस बार वायु परीक्षण शहर के चुनिंदा विद्धानों और दैवज्ञों की उपस्थिति में ही होगा।    

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प्राचीन वेधशाला जंतर-मंतर

जयपुर। प्राचीन वेधशाला जंतर-मंतर के सम्राट यंत्र पर शनिवार को वायु धारिणी पूर्णिमा पर सूर्यास्त के समय 7.20 बजे ध्वज पताका फहरा कर वायु परीक्षण किया जाएगा। इस दौरान ज्योतिषशास्त्री वायु का रुख देख कर सौ किलोमीटर की परिधि में वर्षा के पूर्वानुमान की भविष्यवाणी भी करेंगे। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते इस बार वायु परीक्षण शहर के चुनिंदा विद्धानों और दैवज्ञों की उपस्थिति में ही होगा। जबकि हमेशा 50 से 100 विद्वान इसमें हिस्सा लेते थे। भारतीय ज्योतिष शास्त्र में वायु दृष्टि विज्ञान के आधार पर गत नवम्बर माह से प्रारंभ होने वाले वृष्टि के गर्भाधारण काल से अब तक के आकाशीय लक्षणों व ग्रहयोगों के आधार पर इस वर्ष चातुर्मास में वर्षा योग उत्तम बनता है लेकिन इन योगों के आधार पर परिलक्षित वर्षा के पूर्वानुमान का आषाढ़ी पूर्णिमा को किए जाने वाले वायु परीक्षण के प्रतिफल के साथ तुलनात्मक अध्ययन किए जाने पर ही वर्षा संबंधी पूर्वानुमान की अधिक विश्वसनीय जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। क्योंकि वृष्टि विज्ञान संबंधी शास्त्रों में आषाढ़ी पूर्णिमा के वायु परीक्षण को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। इस दिन शाम के समय पूर्णिमा होने से इसी दिन वायु परीक्षण किया जाएगा।

क्या है वर्षा गर्भाधारण
ज्योतिषाचार्य विनोद शास्त्री के अनुसार आकाश सूर्य की किरणों द्वारा कार्तिक शुक्ला प्रतिपदा से आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तक आठ महिने तक गर्भरूप में धारण किए हुए समस्त समुद्रों के रसायन रूपी जल को ग्रहण करता है। ये आठ माह गर्भाधारण कहलाता है तथा सूर्य द्वारा फैलाया हुआ यह जल आठ माह बाइ अर्थात चातुर्मास में वर्षा के रूप में बरसता है, जिसे वर्षाकाल कहा जाता है। इन आठ मास में तिथियों और नक्षत्रों से बनने वाले योगोें तथा आषाढ़ी पूर्णिमा को सायं सूर्यास्त काल में किए जाने वाले वायु परीक्षण के आधार पर चातुर्मास में वर्षा कैसी होगी, इसका पूर्वानुमान किया जाता है।

आषाढ़ी पूर्णिमा को ही वायु परीक्षण क्यों
वेधशाला के पूर्व अधीक्षक ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा के योग खराब हो जाने पर वर्षा को पुष्ट करने वाले अन्य सभी योग नष्ट हो जाते हैं और यदि अच्छे योग हो जाएं तो वर्षा का नाश करने वाले अन्य कुयोग भी अच्छे हो जाते हैं। इसलिए आषाढ़ी पूर्णिमा के दिन सूर्यास्त काल में किए जाने वाला वायु परीक्षण महत्वपूर्ण माना गया है।

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