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जयपुर
जयपुर से बड़ी खबर हैं। जयपुर की चित्रकूट थाना पुलिस ने एक फर्जी कॉल सेंटर पकडा है। कॉल सेंटर पर फर्जीवाडा इतना गोपनीय तरीके से हो रहा था कि वहां पर काम करने वाले अधिकतर स्टाफ तक को यह नहीं पता था कि वे कॉल सेंटर पर नहीं ठग सेंटर पर काम कर रहे हैं। कई सप्ताह से चल रहे इस कॉल सेंटर को चलाने वाले और मकान मालिक को तलाशा जा रहा है, वे दोनो फरार हैं। इस पूरे मामले का खुलासा आज दोपहर बाद जयपुर पुलिस बड़े स्तर पर करने वाली हैं। कॉल सेंटर पर काम करने वाले 32 लोगों को पकडा गया है, इनमें लड़कियां भी शामिल हैं। ये लोग दिल्ली, यूपी, एमपी, बिहार, राजस्थान, मेघालय समेत अन्य जगहों से आए हुए हैं। इनकी पगार पंद्रह हजार रूपए से लेकर चालीस हजार रुपए तक रखी गई थी। पूरा मामला करोड़ो रुपयों की ठगी का है।
डॉलर में ठगते और रूपयों में बदलवाते... यानि सीधा अस्सी फीसदी मुनाफा,,, करोड़ों रुपयों की ठगी का है पूरा मामला
इंटरनेट के जरिए ठगने की यह विद्या इतनी तगड़ी निकली कि पुलिस अफसर तक हैरान हो गए। चित्रकूट पुलिस ने कल दोपहर में करीब एक बजे इस सेंटर पर रेड की और कार्रवाई शाम सात बजे तक भी चलती रही। यह सेंटर चित्रकूट मार्ग, राम जानकी टॉवर के कमरा नंबर तीन से पांच मंे चल रहा था। चित्रकूट थाना पुलिस ने ही इस मामले में केस दर्ज कराया है। चित्रकूट पुलिस को इस बारे में एक मुखबिर से सूचना मिली थी। उसके बाद पुलिस ने रेड की। पुलिस ने बताया कि टॉवर के हॉल में छोटे छोटे केबिनो मे कम्प्यूटर सिस्टम चलाते हुये लङके व लङकीयाँ मिले। पुलिस ने सभी को दबोच लिया और गिरफ्तार कर लिया। हाँल मे कुल 32 युवक . युवतियाँ अपने अपने कम्प्यूटर सिस्टमो पर बैठे हुये व हैडफोन सिस्टम से काँलिंग करते हुये मिले। उक्त काँलिंग सेन्टर का संचालन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम दीपक शाह बताया। दीपक यूपी का रहने वाला है। दीपक के बारे में पूछताछ के बाद एक युवक से पूछताछ की गई तो पता चला कि वह वहां पर टैक्नीकल सपोर्ट का काम करता हूँ और अमन नाम का युवक यहाँ का सारा मेनेजमेन्ट ओर इस काम मे शामिल हमारे दुसरे साथीयो ओर मालिको द्वारा बताये काम करता है। कॉल सेंटर का मालिक दिलीप तंवर उर्फ सैण्डी है जो फरार है। बिल्डिंग के मालिक सूरज यादव को भी काँल सेन्टर के बारे मे व गलत काम करने की जानकारी थी। काँलिंग के काम मे कोई रूकावट न आये इसकी पूरी जिम्मेवारी बिल्डिंग मालिक सूरज यादव की थी।
दीपक नाम के युवक ने पुलिस को बताया कि यहाँ का मुख्य कम्प्यूटर सिस्टम मेरे पास है, बाकी दुसरे कम्प्यूटर सिस्टमो पर लङके लङकीयाँ कस्टमरो को काँलिंग का काम करते है। हम मुख्यतया यूएसए मे अपने टारगेट चुनते है । हमारे काम मे वैण्डर, डायलर, क्लोजर आदि अलग अलग टर्म है जो काँलिंग करने वाले ओर हमारे बाकी साथी जो अलग अलग जगहो पर है शामिल है। वैण्डर हमे टारगेट्स की डेटा इन्फाँर्मेशन देता है । वेन्डर का नाम मुझे नही पता इतना पता है कि वेण्डर हमारे मालिक दिलीप तंवर उर्फ सैण्डी को टारगेट की डेटा इन्फाँर्मेशन देता है। जो सैण्डी मुझे टेलिग्राम ग्रुप के जरिये बताता है।
पहले वेण्डर टारगेट के सिस्टम को हैक करके उस पर एक मैसेज भेजता है , जिसमे टारगेट को इस आशय का मैसेज प्रदर्शित होता है कि आपका सिस्टम हैक हो चुका है , आप माईक्रोसाँफ्ट के कस्टमर केयर पर काँल करके हैल्प ले सकते है और एक टाँल फ्री नम्बर 888 809.9574 इस मैसेज के साथ शो होता है। वेण्डर द्वारा टारगेट को मैसेज भेजने के बाद सैण्डी के मार्फत टेलिग्राम ग्रुप पर टारगेट को काँल करने व सुनने के लिये मैसेज भेजा जाता है। इस काँलिंग के लिये दो एप्लीकेशन यूज की जाती हैं। वेण्डर रिंग सैन्ट्रल को लाँग इन करने के लिये यूएसए की आई डी और पासवर्ड जनरेट करता है जो मुझे सैण्डी के मार्फत उक्त टेलिग्राम ग्रुप पर मिलते है। जब टारगेट के कम्प्यूटर सिस्टम पर हैक होने का मैसेज आता है तो टारगेट मैसेज मे दिये टोल फ्री नम्बर ;888 809.9574 पर कॉल करता है । यह नम्बर हमारे यहाँ इसी काँल सेन्टर पर रिसीव होता है जिसे हमारे डायलर सुनते है। टारगेट अपने ओरिजनल मोबाईल नम्बर से काँल करता है , जो हमारे पास एप्लीकेशन पर प्रदर्शित होता है , लेकिन यह काँलिंग हिस्ट्री समय समय पर कम्प्यूटर सिस्टम से आँटोमेटीक डिलीट होती रहती है।
जब टारगेट हमारे पास कॉल करके मदद मांगता है तो हम उसे बताते है कि तुम्हारा सिस्टम हैक हो चुका है, हम माईक्रोसाँफ्ट से बोल रहे है और आपका सिस्टम सही करने मे हैल्प करेगें। इसके बाद उसकी तमाम जानकारी जुटाकर उसके खाते खाली कर दिए जाते हैं। इस तरह के मामलों में अक्सर वे लोग फंसते हैं जो छोटे कर्मचारी होते हैं और ज्यादा जानकारी नहीं रखते हैं ।
Published on:
20 Apr 2023 02:06 pm

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