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जयपुर में 1300 साल पुराने ताड़ पत्र पर लिखे ग्रंथ

प्रदेश (rajasthan) में पहली बार जयपुर (jaipur) में जैन धर्म के 1200 से 1300 साल पुराने दुर्लभ ग्रंथों (Rare granth) की प्रदर्शनी (exhibition) लगाई गई है, जिन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रदर्शनी में विश्व की दुर्लभतम कृति में शामिल ‘काष्ठ फलक’ (kaashth phalak) ग्रंथ भी शामिल है, जो संवत 1899 में काष्ठ पर लिखा गया है। वहंी एक इंच कागज पर लिखा गया भक्तामर स्त्रोत (bhaktaamar strot) भी है।

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जयपुर में 1300 साल पुराने ताड़ पत्र पर लिखे ग्रंथ

जयपुर में 1300 साल पुराने ताड़ पत्र पर लिखे ग्रंथ

जयपुर में 1300 साल पुराने ताड़ पत्र पर लिखे ग्रंथ
- एक इंच कागज पर भक्तामर स्त्रोत
- सोने से 4 भाषाओं में लिखा भक्तामर स्त्रोत
- दुनिया की दुर्लभतम कृति ‘काष्ठ फलक’
- दक्षिण भारत के मंदिरों से एकत्र किए हैं ग्रंथ


जयपुर। प्रदेश (rajasthan) में पहली बार जयपुर (jaipur) में जैन धर्म के 1200 से 1300 साल पुराने दुर्लभ ग्रंथों (Rare granth) की प्रदर्शनी (exhibition) लगाई गई है, जिन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। प्रदर्शनी में विश्व की दुर्लभतम कृति में शामिल ‘काष्ठ फलक’ (kaashth phalak) ग्रंथ भी शामिल है, जो संवत 1899 में काष्ठ पर लिखा गया है। वहंी एक इंच कागज पर लिखा गया भक्तामर स्त्रोत (bhaktaamar strot) भी है। इसके साथ करीब 7 से 8 ग्रंथ ताड़पत्रीय हैं, जो करीब 1300 साल पुराने हैं। ये ग्रंथ तमिल भाषा के लिखे गए हैं। प्रदर्शनी में सोने से लिखा गया, भक्तामर स्त्रोत शामिल हैं, जो संस्कृत, सिंधी, रोमन व कन्नड़ चार भाषाओं में लिखा गया हैं।

मानसरोवर के मीरा मार्ग स्थित श्रीआदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के आदिनाथ भवन में यह प्रदर्शनी लगाई गई है। इसका शुभारंभ रविवार को मुनि विद्यासागर महाराज संसघ के सान्निध्य में हुआ। इसमें ताड़पत्र पर लिखे 1300 वर्ष पुराने करीब 7 से 8 ग्रंथ भी हैं, जो कन्नड भाषा में लिखे गए हैं। इनमें सिंद्धांत सागर दीपक, त्रिलोक सार दीपक, रत्नत्रय विधान, पंचकल्याणक विधान, समव सरण विधान, सिद्ध चर्क विधान और भक्तामर स्रोत विधान आदि ग्रंथ है।

प्रदर्शनी में विश्व की दुर्लभतम ग्रंथों में शामिल काष्ठ पर लिखा गया काष्ठ फलक भी हैं, जिसे संवत 1899 में पं. भूधर दास ने लिखा है। इस ग्रंथ में नीति के श्लोक लिखे गए हैं। इसके अलावा काष्ठ पर करीब 400 साल पहले आचार्य उमा स्वामी द्वारा लिखा गया तत्वार्थ सूत्र भी है। इसके साथ ही 350 साल पुरानी आमंत्रण पत्रिका और करीब 200 साल पुराना पंचपरावर्तन का स्वरूप गं्रथ भी शामिल हैं। प्रदर्शनी में काष्ठ पर लिखे गए करीब 10 ग्रंथ शामिल हैं।

यह संकलन बीना के ब्रह्मचारी संदीप सरल ने किया हैं, वे देशभर में इन ग्रंथों की प्रदर्शनी लगा रहे हैं। संदीप सरल बताते हैं कि इन ग्रंथों को दक्षिण भारत के मंदिरों से एकत्र किया गया है। 1200 से 1300 वर्ष प्राचीन इन ग्रंथों को आचार्यों ने आत्म साधना के बल पर लिखा है। नेमी चंद्रीका नामक ग्रंथ में भगवान नेमीनाथ के जीवन चरित्र का वर्णन किया गया है।
चातुर्मास संयोजन राजेन्द्र सेठी ने बताया कि प्रदर्शनी में करीब 200 प्राचीनतम ग्रंथ हैं, जो हजारों साल पुराने हैं। ये ग्रंथ जैन धर्म से जुड़े हुए हैं। प्रदर्शनी सोमवार व मंगलवार को भी लगेगी।