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जयपुर के मुकुल गोस्वामी ने की एशियन गेम्स के निर्णायक मैचों में कमेंट्री, रेडियो पर सुनाया आंखों देखा हाल

एशियन गेम्स में बैडमिंटन के फाइनल मुकाबले शनिवार को खेले गए। इसमें जयपुर के कमेंट्रेटर मुकुल गोस्वामी ने सभी निर्णायक मुकाबलों में कमेंट्री की।

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Jaipur's Mukul Goswami commentary on Asian Games Badminton final

जयपुर।

जाने-माने कॉमेंट्रेटर और मीडिया एक्सपर्ट मुकुल गोस्वामी ने चीन के हांगझोऊ में खेले जा रहे एशियन गेम्स के निर्णायक मैचों में कमेंट्री की। उन्होंने बैडमिंटन के फाइनल मुकाबलों का आंखों-देखा हाल रेडियो पर देश-दुनिया के श्रोताओं तक पहुंचाया। गोस्वामी जयपुर निवासी हैं और कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में लाइव कमेंट्री कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने भारत और मोरक्को के बीच लखनऊ में खेले गए डेविस कप टेनिस चैम्पियनशिप का भी आंखों देखा हाल रेडियो पर सुनाया था।

आकाशवाणी जयपुर के कार्यक्रम अधिकारी राकेश जैन ने बताया कि एशियन गेम्स में बैडमिंटन के फाइनल मुकाबले शनिवार को खेले गए। इसमें जयपुर के कमेंट्रेटर मुकुल गोस्वामी ने सभी निर्णायक मुकाबलों में कमेंट्री की। उनके साथ कमेंट्री पैनल में देश के विभिन्न राज्यों से आए सीनियर कमेंट्रेटर्स भी शामिल रहे।

कमेंट्रेटर मुकुल गोस्वामी ने 'पत्रिका' से बातचीत में बताया कि उन्होंने बैडमिंटन फाइनल्स के पुरुष और महिला एकल स्पर्धाओं के अलावा डबल्स और मिक्स्ड डबल्स स्पर्धाओं में भी कमेंट्री की। इन मैचों में भारत के अलावा चीन, कोरिया और जापान की टीमें शामिल रहीं।

सबसे रोमांचक भारत का मैच
गोस्वामी ने बताया कि वैसे तो सभी खिताबी मुकाबले ज़बरदस्त टक्कर के रहे, लेकिन इनमें भी सबसे ज़्यादा रोमांचक मुकाबला भारत और कोरिया के बीच रहा। मेंस डबल्स के इस निर्णायक मैच में भारतीय जोड़ी सात्विक साइराज और चिराग चंद्रशेखर शेट्टी ने प्रतिद्वंदी कोरिया के चोई और किम की जोड़ी को मात दी। लगभग एक घंटे तक चले इस मैच को भारतीय टीम ने दो सीधे सेटों में 18-21, 16-21 से जीतकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

गौरव का क्षण रहा एशियन गेम्स में कमेंट्री
कमेंट्रेटर मुकुल गोस्वामी ने बताया कि एशियन गेम्स में वे पहले भी कमेंट्री कर चुके हैं। इस तरह की अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाओं में कमेंट्री करना हमेशा से ही रोमांचक और गौरव का क्षण रहता है। इन खेल आयोजनों में सम्पूर्ण एशिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी अपने देश को जिताने में अपना दमखम लगाते हैं।

दर्शकों के साथ खुद भी झूम उठे
गोस्वामी ने बताया कि भारतीय टीम की हर सेट में जीत जहां दर्शकों को ख़ुशी दे रही थी, वहीं कॉमेंट्री बॉक्स में बैठी कॉमेंट्री टीम भी रोमांचित हो रही थी। कई बार ऐसे मौके आए जब कॉमेंट्री करते-करते कॉमेंट्रेटर्स खुद भी ख़ुशी से झूम उठे।

करनी होती है विशेष तैयारी
मुकुल गोस्वामी बताते हैं कि चाहे खेल क्रिकेट का हो, फुटबॉल का हो, टेनिस का हो या बैडमिंटन का, हर बड़ी चेम्पियनशिप में कॉमेंट्री पर जाने से पहले विशेष तैयारी करनी ज़रूरी होती है। मुकाबले में शामिल हो रही टीमों से लेकर हर एक खिलाड़ी का व्यक्तिगत ट्रेक रिकॉर्ड रखना, पूर्व के दिलचस्प किस्से, संबंधित खेल की छोटी-बड़ी बारीकियां, नए फॉर्मेट के नियम-कायदे, यहां तक कि टीमों के कोच और फील्ड अंपायर्स या रेफरी तक की जानकारियां रखनी ज़रूरी होती हैं।

राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर की कमेंट्री
गौरतलब है कि मुकुल गोस्वामी वर्ष 1993 से अब तक लगातार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेलों का आंखो देखा हाल सुना रहे हैं। वे अब तक विश्व कप क्रिकेट, कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियाई खेलों सहित पूर्व में कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में आंखों देखा हाल सुना चुके हैं।