
जयपुर। जेएलएन मार्ग स्थित सरस पार्लर ( Jaipur Saras Dairy ) को निजी हाथों में सौंपने की हड़बड़ी में राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फैडरेशन (आरसीडीएफ) ने 2 माह में 4-5 लाख रुपए खर्च कर दिए लेकिन प्रोडक्ट के लिए पार्लर ( Saras Parlour ) में चीनी सहित अन्य सामग्री नहीं खरीद पाया। ऐसे में रोजाना 2 हजार शहरवासी व पर्यटक निराश लौट रहे हैं।
डेयरी से खींचतान के बाद आरसीडीएफ ने चार सरस पार्लर (जेएनएन मार्ग, हाईकोर्ट, सचिवालय और विधानसभा) के संचालन का जिम्मा खुद संभाला था। कुछ ही महीने में स्थिति बिगडऩे लगी तो आरसीडीएफ ने इन्हें निजी हाथों में सौंपने की तैयारी शुरू कर दी। हाईकोर्ट और सचिवालय स्थित पार्लर को सौंप भी दिया लेकिन जेएलएन मार्ग और विधानसभा स्थित पार्लर को निजी हाथों में नहीं दे पाया। तीन बार निजी फर्म को आमंत्रित करने और 4-5 लाख रुपए खर्च करने के बावजूद अब तक न तो किसी को संचालन का जिम्मा सौंपा, न खुद व्यवस्था संभाल पा रहा है। ऐसे में 3 माह में रह-रहकर मिल्क शेक, कॉफी, आइसक्रीम, कुल्हड़ लस्सी समेत कई प्रोडक्ट की ब्रिकी बंद हो चुकी है। इन दिनों भी यही हाल है। पिछले 28 सितम्बर से चीनी नहीं होने से कुल्हड़ लस्सी और 1 अक्टूबर से शेक फलेवर्ड नहीं होने से मिल्क शेक बंद है। बुधवार तक आइसक्रीम भी बंद हो जाएगी।
फिर बढ़ीं मुश्किलें
सूत्रों के मुताबिक विधानसभा स्थित सरस पार्लर को निजी हाथों में सौंपने के मामले में विधानसभा ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए आपत्ति जता दी है। कुछ दिन पूर्व विधानसभा से आरसीडीएफ को पत्र भेजकर निजी फर्म को देने से मना कर दिया गया। इससे आरसीडीएफ के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं क्योंकि अधिकारी दोनों पार्लर एक साथ देने की कोशिश में जुटे हैं।
सीएमओ ने मांगी रिपोर्ट
उधर, मुख्यमंत्री की जनघोषणा के बाद भी राज्यभर में डेयरी बूथों का आवंटन नहीं होने की खबर राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित होने के बाद सीएमओ ने रिपोर्ट मांगी है। आरसीडीएफ से बुधवार को यह रिपोर्ट भेजेगा।
Updated on:
09 Oct 2019 01:52 pm
Published on:
09 Oct 2019 01:49 pm
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