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आज ही के दिन सीरियल बम धमाकों से थर्रा उठा था जयपुर, हर तरफ था तबाही का मंजर

13 मई 2008 ( Jaipur serial blast 13 May 2008 ) को जयपुर के लोगों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा था जिसके घाव आज भी लोगों के दिलों पर ताजा है। भले ही इस बात को 12 साल हो गए हो, लेकिन जब भी उस मनहूस घड़ी को जयपुरवासी याद करते हैं तो सहम जाते हैं...jaipur blast

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जयपुर

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Dinesh Saini

May 13, 2020

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जयपुर। 13 मई 2008 ( Jaipur serial blast 13 May 2008 ) को जयपुर के लोगों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा था जिसके घाव आज भी लोगों के दिलों पर ताजा है। भले ही इस बात को 12 साल हो गए हो, लेकिन जब भी उस मनहूस घड़ी को जयपुरवासी याद करते हैं तो सहम जाते हैं। हमेशा शांत रहने वाली पिंकसिटी में ऐसा पहली बार था जब आतंकियों ने धमाके ( Jaipur blast ) किए। जयपुर के पर्यटन को प्रभावित करने के लिए आतंकियों ने धमाकों के लिए जयपुर की चारदीवारी क्षेत्र को चुना।

इन धमाकों की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिद्दीन ने ली थी। वहीं भारतीय गृह मंत्रालय ने इन धमाकों के पीछे बांग्लादेश बेस्ड ऑर्गेनाइजेशन हरकत उल जिहाद अल इसलाम और इस्लामिक हॉली वार मूवमेंट का हाथ होने का संदेश जताया था। जयपुर पुलिस ने बम धमाकों के लिए 13 लोगों को जिम्मेदार ठहराया था। इनमें से 3 आरोपी अभी भी पुलिस, वर्तमान में राजस्थान एटीएस की पकड़ से दूर हैं। जबकि 3 आरोपी दिल्ली और हैदराबाद में बम धमाके करने के मामले में वहां की जेलों में बंद है। दो आरोपी दिल्ली में बाटला हाउस मुठभेड़ में मारे गए थे। पांच आरोपी राजस्थान एटीएस ने गिरफ्तार किए।

यहां हुए बम धमाके
आतंकियों ने बड़ी चौपड़, मानक चौक पुलिस स्टेशन के पास, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, छोटी चौपड़ और कोतवाली इलाके में 15 मिनट के अंदर 8 सीरियल बम धमाके किए। पहला धमाका शाम करीब 7.10 बजे हुआ था। धमाकों के बाद हर तरफ तबाही का मंजर था और शहर में लाशों को अंबार। इन सीरियल बम धमाकों में 71 लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी और 185 लोग घायल हुए थे।


चुना था शाम का समय
आतंकियों ने जयपुर को दहलाने के लिए शाम का समय चुना था क्योंकि शाम के वक्त शहर में काफी भीड़ रहती है। 13 मई की शाम को मंदिरों में आरती हो रही थी, दुकानदार अपने कामों में लगे हुए थे। शहर दौड़ रहा था, जैसे ही धमाकों की आवाजे आने लगी तो लोग सहम गए। बम धमाकों का पता चलते ही लोग इधर से उधर भागने लगे। बाजार बंद होते गए। कुछ लोग दुकानें खुली छोड़ भागे। शहर की सडक़े सूनी हो गई। लोग घरों में बंद से हो गए। कुछ लोगों ने मंदिरों में शरण ली।