मी को सौखने की विशेषता के कारण बरसों बाद भी हमारे गढ़ किलों और हवेलियों का कुछ नहीं बिगड़ा है। आमागढ़ का पत्थर तो जयपुर के लिए वरदान साबित हुआ है। सर्दी में गरम और गर्मी में ठंडा रहने वाला यह पत्थर बरसात की नमी को सौंख लेता है। विख्यात वास्तु शास्त्री विद्याधरजी और उनके सहयोगी राव कृपाराम आदि ने आमागढ़ पहाड़ के पत्थर को जलवायु के अनुरूप मानते हुए भवन निर्माण के लिए बेहतर माना था।