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जयपुर में बत्तियां बनी ‘जाम पॉइंट’, आमजन को कब मिलेगी राहत? AI से जोड़ें सिस्टम तो बने बात

Jaipur traffic system : शहर की वीवीआइपी सड़कों पर चौराहे भी 'जाम' पॉइंट बनते जा रहे हैं। स्थिति यह है कि पीक आवर्स में वाहन चालकों को 5 से 7 मिनट तक ट्रैफिक सिग्नल पर खड़े रहकर तीसरी-चौथी बार हरी बत्ती होने का इंतजार करना पड़ रहा है।

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जयपुर

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Supriya Rani

Feb 28, 2024

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Jaipur traffic system : शहर की वीवीआइपी सड़कों पर चौराहे भी 'जाम' पॉइंट बनते जा रहे हैं। बढ़ते यातायात दबाव के चलते वाहन चालकों को चौराहों पर जाम से जूझना पड़ रहा है, जैसे-तैसे एक चौराहे से निकले पर अटक रहे हैं। स्थिति यह है कि पीक आवर्स में वाहन चालकों को 5 से 7 मिनट तक ट्रैफिक सिग्नल पर खड़े रहकर तीसरी-चौथी बार हरी बत्ती होने का इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ जगह तो लाल बत्ती भी 245 सेकंड तक हो रही है।

ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने के लिए हर चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल हैं, लेकिन सिग्नल का टाइम मैनेजमेंट 'मनमर्जी' का होने से वीवीआइपी सड़कों पर जाम लग रहा है। ट्रैफिक पुलिस यातायात दबाव को लेकर सिर्फ चार चौराहों को ही व्यस्ततम मान रही है। इनमें ओटीएस चौराहा सबसे व्यस्त है। यहां पीक आवर्स में साइकिल टाइम 220 सेकंड का तय किया हुआ है।

दूसरा व्यस्ततम चौराहा जेडीए सर्कल है, यहां पीक आवर्स में साइकिल टाइम 180 सेकंड का तय किया हुआ है। ऐसे शहर की जरूरत ट्रैफिक सिग्नल मैनेजमेंट सिस्टम में एआइ के इस्तेमाल की है। इस तकनीक से ट्रैफिक सिग्नल को सही तरीके से संचालित किया जा सकता है। सिग्नल पर अगर यातायात दबाव बढ़ता है तो वह तय समय से पहले ही हरी बत्ती कर सकता है, इससे वाहन चालकों के इंतजार करने का समय कम हो जाएगा।

डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में साइकिल अधिक हैं, वहां साइकिल लेन सिस्टम को व्यवस्थित रखने के लिए एआइ का इस्तेमाल किया जाता है। एआइ चूंकि तेजी से गणना करती है, इसलिए यह तकनीक शहर के यातायात को सुगम करने में मददगार हो सकती है।

एआइ एल्गोरिदम जीपीएस डिवाइस, पीक आवर्स मौसम के अनुसार बढ़ने वाले यातायात दबाव को लेकर पहले ही अलर्ट कर देने में मददगार होता है।

एआइ से किसी जगह विशेष की ट्रैफिक हिस्ट्री निकाली जा सकती है। इससे वह आने वाले दिनों में यातायात दबाव का समय पहले ही बता देती है।

इस तकनीक से पहले ही पता चल जाता है कि आने वाले समय में किस रोड पर कितनी भीड़ रहेगी। यह रूट डायवर्जन कराने में भी मददगार हो सकता है।

पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यातायात अनिल गोठवाल का कहना है कि जिन चौराहों पर यातायात का दबाव अधिक रहता है, वहां अंडरपास या ओवरब्रिज बनाए जाने चाहिए। इसके अलावा, जहां रोड की चौड़ाई कम हो, उसे बढ़ाकर ट्रैफिक को सुगम किया जा सकता है। अलग से स्लिप लेन भी बनाई जा सकती है।

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