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Jaipur में 250 से घटकर रह गए इतने वार्ड, 78 गांवों को मिलेगी बेहतरीन सुविधाएं

राजधानी जयपुर की नगरीय सीमा का विस्तार कर 78 गांवों को जोड़ा गया है।

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Jaipur Nagar Nigam: राजधानी जयपुर का विस्तार होते-होते गांवों तक पहुंच गया। आस-पास की कई पंचायतें अभी तक अघोषित तौर पर जयपुर शहर का हिस्सा हैं। जहां बड़ी-बड़ी इमारतें हैं लेकिन वास्तविक तौर पर यह किसी पंचायत का हिस्सा हैं। सीमित बजट और संसाधन होने से पंचायतें बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं कर पा रहीं। राजधानी की नगरीय सीमा का विस्तार कर 78 गांवों को जोड़ा गया है। निगम सीमा में आने से सालाना बजट मिलेगा। इसके अलावा शहरी क्षेत्र के हिसाब से भी काम करवाए जा सकेंगे।

आने वाले समय में यहां बिजली, पानी की सुविधाओं के साथ निगम के स्तर पर करवाए जाने वाले विकास कार्य भी तेज गति से हो सकेंगे। अब इन इलाकों में निवास कर रही ग्रामीण आबादी को कामकाज के लिए दूर आना-जाना पड़ेगा। 30 वर्ष बाद जयपुर में निगम सीमा का विस्तार किया गया है। जगतपुरा, मानसरोवर, दिल्ली रोड, आगरा रोड, सीकर रोड, अजमेर रोड के कई गांव निगम सीमा के दायरे में होंगे।

दो बोर्ड बनते ही कांग्रेस को मिला था फायदा

वर्ष 1994 में जयपुर नगर निगम बना। वर्ष 2009 में महापौर पद के लिए सीधे चुनाव हुआ। इसमें कांग्रेस की ज्योति खंडेलवाल महापौर बनी थीं। लेकिन तब भी बोर्ड में बहुमत हमेशा की तरह भाजपा का ही आया। इससे पहले तीन बोर्ड और इसके बाद 2013 से 2018 में भाजपा का दबदबा रहा। इसके बाद पिछली कांग्रेस सरकार ने हैरिटेज और ग्रेटर निगम बनाए। हैरिटेज में आदर्श नगर, किशनपोल, हवामहल, सिविल लाइंस और आमेर विधानसभा क्षेत्र के कुछ इलाके शामिल किए गए।

इन क्षेत्रों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंकों के सहारे अच्छा प्रदर्शन करती आई है। निगम के तौर पर यह अलग करते ही कांग्रेस का यहां बोर्ड बन गया। दूसरी तरफ ग्रेटर में मालवीय नगर, सांगानेर, विद्याधर नगर, बगरू और झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के इलाके जोड़े गए। ये इलाके पंरपरागत तौर पर भाजपा के गढ़ रहे हैं। ऐसे में यहां भाजपा काबिज हो गई। इस तरह दो निगम करते ही कांग्रेस को जयपुर शहर में फायदा मिला।

ये होंगे फायदे

-जो पंचायतें निगम सीमा क्षेत्र में आ गई हैं वहां शहरी स्तर की सुविधाएं मिलेंगी। यहां न सिर्फ अच्छी सड़क का निर्माण होगा बल्कि स्ट्रीट लाइट, सीवरेज और पेयजल आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद बढ़ेगी।

-स्वच्छता और सफाई में सुधार आएगा, यहां भी निगम के हूपर पहुंचेंगे।

-निगम सीमा क्षेत्र में शामिल हुईं पंचायतों में आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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निगम को फायदा

नगरीय विकास कर के अलावा विवाह स्थलों से किराया मिलेगा। नई विज्ञापन साइट तय होंगी। इससे राजस्व में वृद्धि होगी।

सरपंच बोले…अब दूर जाना पड़ेगा

पहले ग्रामीणों के आवश्यक काम स्थानीय पंचायत व पंचायत समिति में हो जाते थे अब जयपुर शहर नगर निगम मुयालय जाना पड़ेगा। -जगदीश वर्मा, सरपंच मांचवा

30 साल पहले सिंवार, किशोरपुरा आदि गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया था वहां आज तक समुचित विकास नहीं हो पाया, ऐसे में निगम में शामिल जयपुर से दूरी वाले गांवों में कितना विकास हो पाएगा यह भविष्य बताएगा। -रामफूल भावरिया, पंचायत समिति सदस्य झोटवाड़ा निवासी मांचवा

निगम के लिए चुनौती

निगम के मौजूदा संसाधन शहर के बाहरी वार्डों में ही समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण इलाकों को शहरी सीमा में जोड़ने से यहां तक सुविधाएं पहुंचाना चुनौती से कम नहीं होगा। निगम सीमा में आने से सपत्ति मूल्य में भी बढ़ोतरी होने का अनुमान है।

ग्रेटरः ये ग्राम पंचायतें शामिल

-ग्राम पंचायत सरना डूंगर, बावड़ी और मंशारामपुरा, ग्राम पंचायत हाथोज और बीड़ हाथोज, ग्राम पंचायत माचवा का राजस्व ग्राम नारी का बास और माचवा, ग्राम पंचायत पीथावास और लालचंदपुरा, ग्राम पंचायत सबरामपुरा का राजस्व ग्राम पिंडोलाई और सबरामपुरा, ग्राम पंचायत निवास का राजस्व ग्राम निवारू, ग्राम पंचायत बोयतावाला का सम्पूर्ण सीमा क्षेत्र, ग्राम पंचायत मुहाना, ग्राम पंचायत मदाउ, बाढ़ मोहनपुरा, जगतश्रवणपुरा, पीपला भरत सिंह और मोहनपुरा का सम्पूर्ण सीमा क्षेत्र।

-ग्राम पंचायत जगन्नाथपुरा, महासिंहपुरा, रातल्या और मनोहरीयावाला, ग्राम पंचायत विधानी, मथुरावाला, रामचन्दपुरा, सालिगरामपुरा, श्री किशनुपरा, विमलपुरा, जयचंदपुरा, ग्राम पंचायत दांतली, चतरपुरा और सीस्यावास।

ग्राम पंचायत गोनेर, ग्राम पंचायत बीलचाकला, लक्ष्मीपुरा और प्रह्लादपुरा, ग्राम पंचायत श्रीराम की नांगल और लक्ष्मीपुरा, ग्राम पंचायत आशावाला, बाड़श्योपुर, जयसिंहपुरा बास-बीलवा, सुखदेवपुरा उर्फ नोहरा, ग्राम पंचायत खेड़ी गोकुलपुरा, बक्शावाला और ग्वार ब्राह्मणान श्योसिंहपुरा।

-ग्राम पंचायत जयसिंहपुरा, चकहरवंशपुर और नरोत्तमपुरा, ग्राम पंचायत बड़ी का बास, खूसर, मुरलीपुरा और रामपुरा सुखदेवपुरा, ग्राम पंचायत सिरोली, चक सालिगरामपुरा, जयसिंहपुरा बास और जीरोता, ग्राम पंचायत मोहनपुरा का राजस्व ग्राम खेतापुरा, ग्राम पंचायत दादिया का राजस्व ग्राम बदनपुरा।

—ग्राम पंचायत आकेड़ा डूंगर, जैसल्या और मयला बाग, ग्राम पंचायत अखेपुरा, लक्ष्मीनारायणपुरा, शिस्यावास, बड़ागांव जरख्या का सम्पूर्ण सीमा क्षेत्र शामिल किया गया है।

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हैरिटेजः ये ग्राम पंचायतें शामिल

-ग्राम पंचायत विजयपुरा का सम्पूर्ण क्षेत्र, ग्राम पंचायत सुमेल, रूपा की नांगल, गालपुरा डूंगर, गालपुरा चीर, बल्लूपुरा, बीरमलपुरा और मुकन्दपुरा, ग्राम पंचायत बगराना, ग्राम पंचायत नांगल सुसावतान का राजस्व ग्राम किशनपुरा उर्फ लालवास का सम्पूर्ण सीमा क्षेत्र शामिल किया गया है।