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जयपुर. राजस्थान उच्च न्यायालय की वृहदपीठ ने सालों पुराने मामले को निपटाते हुए जामिया उर्दू अलीगढ़ की डिग्रियो को मान्यता दी है। राजस्थान उच्च न्यायालय की दो अलग-अलग खंडपीठ के विरोधाभासी फैसलों की वजह से मामला वृहदपीठ को भेजा गया था। जामिया उर्दू अलीगढ़ के अदीब कोर्स को सैकेंडरी, माहिर कोर्स को सीनियर सैकेंडरी और मोअल्लिम कोर्स को स्नातक के बराबर माना जाता था। इस मामले में उच्च न्यायालय ने 2002 में तैय्यब हुसैन और 2004 में अल्ताफ बानो के केस में डिग्री को मान्य करार दिया था। इसके बाद जामिया उर्दू अलीगढ़ से डिग्री लेने वाले कई अभ्यर्थी प्रबोधक, एएनएम और जीएनएम भर्ती में चयनित हो गए। इसके बाद में 2006 में हाईकोर्ट ने फिरदौस तरन्नुम के मामले में इन तीनों कोर्स को सैकेंडरी, सीनियर सैकेंडरी और स्नातक के समान मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद अभ्यर्थियों का चयन रद्द हो गया तो मामला पुन: न्यायालय में पहुंचा। दो अलग-अलग खंडपीठ के फैसलों में मत भिन्नता की वजह से मामले को वृहदपीठ में भेज दिया गया।
Published on:
22 Feb 2020 05:44 pm
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