
भगवान श्रीकृष्ण के चरणों से जयपुर की धरा भी पवित्र हुई है। हजारों साल पहले मथुरा से द्वारिका जाते समय श्रीकृष्ण आमेर के रास्ते से निकले थे। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की इस यात्रा का गवाह है, नाहरगढ़ की पहाड़ी स्थित चरण मंदिर।

श्रीकृष्ण अपने प्रिय पाण्डवों से अज्ञातवास व वन गमन के समय कई बार यहां मिलने आए थे। उनके ढूंढाड़ की धरा पर आने का प्रमाण अम्बिका वन (आमेर) का भागवत प्रसंग भी है। द्वापर युग में नाहरगढ़ के पास में स्थित चरण मंदिर का पहाड़ी वन क्षेत्र अम्बिका वन के नाम से जाना जाता था।

पन्द्रहवीं शताब्दी में आमेर नरेश मानसिंह (प्रथम) ने चरण मंदिर को भव्य रूप दिया था।

सवाई जयसिंह द्वितीय ने नाहरगढ़ पहाड़ी पर सुदर्शन गढ़ के नाम से किला बनवाना शुरू किया, लेकिन नाहरसिंह भोमिया जी के व्यवधान के कारण किले का नाम सुदर्शन गढ़ के बजाय नाहरगढ़ रखा गया।