
भरा है पक्ष-विपक्ष का पिटारा, जनता के मुद्दे जस के तस
जयपुर।
फिर वही चुनाव, सरकार के दावे और विपक्ष के आरोप। पौने पांच साल बाद भले ही सरकार के पास उपलब्धियों और विपक्ष के पास आरोपों का पिटारा पूरा भरा हो लेकिन जनता की स्थिति जस की तस ही नजर आ रही है। राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि इस चुनाव में भी क्षेत्रवार वे ही मुद्दे हावी रहेंगे, जो हर बार चुनाव से पहले उठाए जाते हैं और चुनाव के बाद बिसरा दिए जाते हैं।
जयपुर संभाग की स्थिति ही देखें तो यहां इस बार भी पानी की समस्या बड़े मुद्दे के रूप में उभरकर सामने आने के आसार हैं। स्थिति यह है कि जयपुर शहर के आधे से ज्यादा इलाके आज भी पेयजल के लिए तरस रहे हैं और 1500 से ज्यादा कॉलोनियों को अब भी नियमन का इन्तजार है। नियमन के बिना यहां विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
जयपुर संभाग : मुद्दे और स्थिति
जयपुर शहर
- सरकार का दावा : पौने पांच साल में बीसलपुर का पानी नई कॉलोनियों में पहुंचाया। रिंग रोड की अड़चनें दूर की गईं और तेजी से काम चल रहा है। सोढाला से अम्बेडकर सर्कल तक नई एलीवेटेड रोड तेजी से बन रहा है। इसका काम 2019 के आरंभ तक पूर्ण होना प्रस्तावित है।
- बड़ा मुद्दा : जयपुर में आज भी करीब 60 प्रतिशत घरों में सरकारी पेयजल नहीं मिल रहा है। नियमन नहीं होने के कारण करीब 1500 कॉलोनियां पानी, बिजली, सड़क और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी तरस रही हैं। जेडीए हो या नगर निगम, शहर के विकास का काम देखने वाली एजेंसियों का इन कॉलानियों पर कोई ध्यान नहीं है।
जयपुर ग्रामीण
- सरकार का दावा : चौमूं के लिए पेयजल योजना की घोषणा की, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र खोला। सभी विधानसभा क्षेत्रों में गौरव पथ बनाए। पर्यटन स्थलों पर करोड़ों रुपए खर्च किए। चाकसू में सेटेलाइट अस्पताल खोलने की घोषणा की।
- बड़ा मुद्दा : विराटनगर, शाहपुरा, कोटपूतली औद्योगिक विकास को तरस रहे हैं। सड़कों का हाल खराब है। जयपुर से दिल्ली के बीच नेशनल हाईवे के हालात भी बहुत अच्छे नहीं हैं। क्षेत्र में खनन की बड़ी संभावना है लेकिन खनन नीति स्पष्ट नहीं होने के कारण अंधाधुंध अवैध खनन हो रहा है। अस्पतालों में चिकित्सक और नर्सिंग कर्मियों की भारी कमी है। चौमूं में सीवरेज की घोषणा भी पूरी नहीं हुई।
सीकर
- सरकार का दावा : रसीदपुरा में प्याज की मंडी खोली, सभी विधानसभा क्षेत्रों में गौरव पथ बनवाए।
- बड़ा मुद्दा : मेडिकल कॉलेज की मांग प्रबल है। चूरू में तो मेडिकल कॉलेज की घोषणा कर दी गई लेकिन लोगों की मांग है कि मेडिकल क्षेत्र में सीकर बहुत आगे है, वहां भी मेडिकल कॉलेज खोला जाना चाहिए। मिनी सचिवालय और नवलगढ़ चौराहे पर फ्लाइओवर की मांग भी लम्बे समय से बनी हुई है।
झुंझुनूं
- सरकार का दावा : केन्द्र सरकार ने यहां सैनिक स्कूल खोला है। नहरी पानी के पहले चरण को मंजूरी मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में गौरव पथ बने हैं।
- बड़ा मुद्दा : नहरी पानी के लिए पहले चरण को मंजूरी तो मिल गई लेकिन पानी आज तक नहीं मिला। यमुना के पानी का मुद्दा यहां 30 साल से चला आ रहा है। पूर्व सांसद शीशराम ओला के समय से ही यह राजनीतिक मुद्दा रहा है। खेल अकादमी की मांग भी उठती रहती है।
अलवर
- सरकार का दावा : जिले में 2 नए कॉलेज खोले। थानागाजी में नगर पालिका की घोषणा की। खैरथल बाइपास को मंजूरी मिल चुकी है। हर साल प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 50 लाख से ज्यादा के विकास कार्य कराए गए हैं।
- बड़ा मुद्दा : चंबल से पानी लाने का सपना अब भी अधूरा है। सतही जल योजना का मुद्दा भी बड़ा है। ईएसआइसी मेडिकल कॉलेज शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों का हाल खराब है।
दौसा
- सरकार का दावा : लवाण और मंडावर को तहसील, नांगल राजावतान को उपखंड मुख्यालय का दर्जा दिया गया। बीसलपुर से तूंगा होते हुए दौसा तक पानी की पाइप लाइन बिछाई गई।
- बड़ा मुद्दा : दौसा, बांदीकुई, बसवा, महुवा में आज भी पीने का पानी बड़ी चुनौती बना हुआ है। ईसरा बांध से दौसा तक पानी लाने की 18 हजार करोड़ की योजना हर बार की तरह इस बार भी खटाई में है। दौसावासियों को पीने का पानी उपलब्ध कराने का दावा हर बार किया जाता रहा है।
तेजी से हुए जनता के काम
ग्रामीण आधारभूत ढांचा पहली बार मजबूत हुआ है। सड़कों की कनेक्टिविटी बढ़ाई गई है। ग्रामीण गौरव पथ बनाए गए हैं। पंचायत मुख्यालयों की दशा सुधरी है। प्रत्येक ग्राम पंचायत में सीनियर सैकंडरी ।
Published on:
01 Sept 2018 04:06 am
