हर देश अपनी जीडीपी में स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा के साथ शिक्षा पर सबसे ज्यादा हिस्सा खर्च करते है। देश को चलाने वाली संस्थाएं इसके लिए कई नवाचार करती हैं, लेकिन इन सबके बीच जापान में सरकार ने एक ऐसा कदम उठाया है जो ना सिर्फ दुनिया के बाकी देशों बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक साबित होता रहेगा…
जापान में एक ऐसा गांव होक्काइडो है जहां की जनसंख्या बहुत कम है. इतनी कम कि इस गांव के क्यू-शिराताकी रेलवे स्टेशन को बंद करने का फैसला लेना पड़ा था। इसी गांव की एक लड़की रोज उसी स्टेशन से स्कूल जाने के लिए ट्रेन पकड़ती थी। दिक्कत ये कि ट्रेन के इस स्टेशन से बंद हो जाने पर उसकी पढ़ाई छूटने का डर था… क्योंकि इस सुदूर इलाके से स्कूल तक जाने का और कोई जरिया नहीं था…
यह बात जब यहां के रेलवे विभाग को पता चली तो सरकार ने बिना देरी किए इस स्टेशन से ट्रेन का जारी रखने का अहम फैसला लिया.. अब ये ट्रेन इस अकेली लड़की को लेने के लिए ही इस स्टेशन पर रोजाना पहुंचती है। इतना ही नहीं अब इस ट्रेन का टाइम भी इस बच्ची के स्कूल के मुताबिक रखा गया है… जिस दिन इस लड़की के स्कूल की छुट्टी होती है उस दिन ट्रेन भी इस स्टेशन पर नहीं आती है, क्योंकि स्कूल के छुट्टी के दिनों की सारी जानकारी रेलवे विभाग के पास भी है। यही नहीं सरकार ने ये भी फैसला किया कि जब तक ये बच्ची ग्रेजुएट नहीं हो जाती तब तक ये ट्रेन लगातार इस स्टेशन पर आती रहेगी..
ये उदाहरण सिर्फ दुनिया की बाकी सरकारों के लिए सबक नहीं है बल्कि उन परिवारों और समाज के लिए भी एक सीख है, जो बेटियों को महज बोझ समझकर उन्हें नजरअंदाज करते हैं। ये सबक है उन लोगों के लिए जो शिक्षा के महज औपचारिकता समझते हैं…. जबकि शिक्षा ही वो जरिया है जिसके जरिए कोई मनुष्य इंसान बनने का सफर पूरा करता है।