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जेडीए की उद्यान शाखा ने मानी गलती: छोटे पौधे हटावाए, बड़े रखवाए

जेडीए की उद्यान शाखा ने अपनी गलती मानते हुए वितरण केंद्र से छोटे पौधों को हटा लिया है। इनकी जगह बड़े पौधे रखवाए गए हैं। अब शहरवासियों को रियायती दर पर बड़े पौधे दिए जा रहे हैं। पौधा वितरण में लापरवाही बरतने वाली यादव कंस्ट्रक्शन कम्पनी को उद्यान शाखा ने नोटिस भी जारी किया है।

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जेडीए की उद्यान शाखा ने मानी गलती: छोटे पौधे हटावाए, बड़े रखवाए

जेडीए की उद्यान शाखा ने मानी गलती: छोटे पौधे हटावाए, बड़े रखवाए

जयपुर. जेडीए की उद्यान शाखा ने अपनी गलती मानते हुए वितरण केंद्र से छोटे पौधों को हटा लिया है। इनकी जगह बड़े पौधे रखवाए गए हैं। अब शहरवासियों को रियायती दर पर बड़े पौधे दिए जा रहे हैं। पौधा वितरण में लापरवाही बरतने वाली यादव कंस्ट्रक्शन कम्पनी को उद्यान शाखा ने नोटिस भी जारी किया है। इसमें लिखा है कि 25 फीसदी पौधे तय ऊंचाई से कम के हैं। सूखे और छोटे पौधों को हटाकर अच्छी गुणवत्ता और तय मापदंड के पौधे रखवाए जाएं। इसी फर्म के पास जवाहर सर्कल, सेंट्रल पार्क, सामुदायिक केंद्र (त्रिवेणी नगर) और सीकर रोड स्थित स्मृति वन में पौधा वितरण का काम भी है। 13 हजार पौधे बांटने का लक्ष्य है।

जोन प्रभारी रहे चुप

हैरानी की बात यह है कि पौधा वितरण में उद्यान शाखा ने जोन प्रभारी भी तैनात किए हैं। जोन प्रभारी अब्दुल मजीद और उमेश गुप्ता नियमित निगरानी कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्होंने फर्म को मनमानी करने से नहीं रोका और फर्म 10 रुपए का पौधा रियायती दर के नाम पर 50 रुपए में देती रही।

ऐसे पहुंचाया जा रहा नुकसान
17 हजार पौधों को खरीदने के लिए जेडीए ने 51 लाख रुपए खर्च किए हैं। रियायती दर पर जेडीए को 8.50 लाख रुपए मिलेंगे। जबकि, पिछले वर्षों में जेडीए इतने पौधों को खरीदने के लिए 2.55 लाख रुपए खर्च करता था और 1.7 लाख रुपए राजस्व में वापस आते थे।

वन विभाग से बनाई दूरी
वन विभाग ने जेडीए को आठ लाख, हैरिटेज नगर निगम को 4.66 और ग्रेटर नगर निगम को 5.90 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया। लेकिन तीनों महकमों ने ही वन विभाग के पौधों से दूरी बना ली।

वन विभाग की ये कीमत
छह माह का पौधा नौ रुपए
12 माह का पौधा 15 रुपए

सूखे और छोटे पौधों को हटवा दिया गया है। अब अच्छे पौधे शहरवासियों को दिए जा रहे हैं। जिस फर्म ने गड़बड़ की, उसको नोटिस दिया गया है। यदि आगे इस तरह की गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी।

-कन्हैयालाल शर्मा, वरिष्ठ उद्यानविज्ञ, जेडीए