
जयपुर. कभी गर्मी तो कभी ठंडक। मौसम में हो रहे बदलाव का खामियाजा बच्चों को उठाना पड़ रहा है। गर्म-सर्द होने के कारण बच्चों में एक्यूट रेस्पीरेटरी इलनेस यानी खांसी-जुकाम, बुखार की शिकायत बढऩे लगी हैं। खासकर पांच से कम उम्र के बच्चे सर्दी, खांसी, बुखार, उल्टी के साथ डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। जेके लोन अस्पताल में मई से लेकर अब तक चार हजार से अधिक बच्चों की ओपीडी रही। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे एआरआइ की समस्या के आए। आंकड़ों के अनुसार पिछले एक महीने में 1979 बच्चों को खांसी-जुकाम, बुखार की समस्या थी। चिकित्सकों का कहना है कि मौसम परिवर्तन के साथ-साथ कोरोना के डर से भी खांसी-जुकाम, बुखार के मरीज बढऩे लगे हैं।
पायरेक्सिया (बुखार) के मरीज भी हुए ज्यादा
अस्पताल में बुखार के मरीज भी ज्यादा आए। चिकित्सकों ने बताया कि बीच-बीच में तेज गर्मी पडऩे से बच्चे पायरेक्सिया के शिकार हुए। एक महीने में 1039 बच्चों को बुखार आया।
सावधानी जरूरी, बढ़ेगा निमोनिया
लॉकडाउन की वजह से प्रदूषण का स्तर कम रहा। इसलिए निमोनिया के केस कम आए हैं। जिस तरह से बारिश हो रही है। अब निमोनिया के केस बढऩा शुरू होंगे। इसलिए सावधानी बरतनी जरूरी है। अभी तक पिछले एक महीने में करीब 604 बच्चों का निमोनिया का इलाज किया गया। इनमें 42 बच्चों को भर्ती किया गया। यदि बच्चे की सांस की गति में तेजी लगे। यानि सांस की गति 50 बार प्रति मिनट से ज्यादा है। तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। घर पर इलाज नहीं करें।
30 दिन के ये हैं हालत
एक्यूट रेस्पीरेटरी इलनेस-1979
डायरिया-691
निमोनिया-604
इंफ्लूएंजा-271
पायरेक्सिया-1039
सेप्टीसिमिया-306
इनका कहना है-
लॉकडाउन की वजह से अस्पताल में आउटडोर कम रहा, लेकिन इनमें खांसी-जुकाम, बुखार के मरीजों की संख्या ज्यादा रही। कोरोना की वजह से भी परिजन जागरूक हुए। खांसी- जुकाम होते ही बच्चों को लेकर अस्पताल पहुंचे।
- डॉ. अशोक गुप्ता, अधीक्षक, जेके लोन अस्पताल
Published on:
08 Jun 2020 08:33 pm
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