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10वीं फर्जी मार्कशीट से पाई डाक विभाग में सरकारी नौकरी, अब ऐसे खुला मामला

जयपुर के शास्त्री नगर थाने में डाक विभाग के एक कर्मचारी के खिलाफ दसवीं की फर्जी अंकतालिका लगाकर नौकरी लग जाने का मामला दर्ज करवाया गया है। पुलिस ने बताया कि डाक विभाग में जयपुर देहात मंडल के अध्यक्ष घनश्याम गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज करवाई।

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जयपुर के शास्त्री नगर थाने में डाक विभाग के एक कर्मचारी के खिलाफ दसवीं की फर्जी अंकतालिका लगाकर नौकरी लग जाने का मामला दर्ज करवाया गया है। पुलिस ने बताया कि डाक विभाग में जयपुर देहात मंडल के अध्यक्ष घनश्याम गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज करवाई। उन्होंने रिपोर्ट में बताया कि डाक सेवकों के 146 रिक्त पदों की वर्ष 2022 में विज्ञप्ति जारी कर भर्ती की गई थी।

कोटपुतली के छारदारा निवासी विक्रम यादव का चयन अकोदा लेखा कार्यालय फुलेरा उपडाकघर के लिए हुआ। विक्रम ने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना की दसवीं की अंकतालिका मूल दस्तावेज में जमा करवाई। विभाग ने बिहार संस्कृत शिक्षा बोर्ड, पटना को अंकतालिका तस्दीक के लिए भेजी गई, जहां से 25 जुलाई 2023 को प्राप्त हुई रिपोर्ट में अंकतालिका को फर्जी बताया गया।

गौरतलब है कि नागौर में भी ऐसा ही मामला सामने आया था, जब फर्जी टीसी के जरिए एक कर्मचारी 18 साल तक नौकरी करता रहा। नतीजा यह रहा कि लाखों की चपत लगाने के बाद खुलासा तब हुआ जब किसी ने इसकी शिकायत रोडवेज के मुख्य प्रबंधक से की। अब मामला कोतवाली थाना पुलिस में दर्ज किया गया। सूत्रों के अनुसार नागौर रोडवेज डिपो (राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम) के मुख्य प्रबंधक राजेश जाट की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई। रिपोर्ट में मुख्य प्रबंधक ने बताया कि नागौर आगार में किशोर सिंह राजपूत बतौर चालक वर्ष 2005 से नौकरी कर रहा है।

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उसके खिलाफ कुछ दिनों पहले शिकायत मिली कि किशोर सिंह ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है। इसकी ओर से प्रस्तुत टीसी फर्जी है। इस शिकायत पर परिवहन निगम की ओर से जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) को टीसी की जांच बाबत पत्र भेजा। जिला शिक्षा अधिकारी ने इसके लिए जांच दल गठित कर प्रकरण की पड़ताल करवाई। जांच में सामने आया कि छह जुलाई 1979 को तोषिणा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में प्रवेश की संख्या 1054 से 1963 तक है। किशोर सिंह का नाम इसमें नहीं है। इस शिकायत के साथ जांच रिपोर्ट जयपुर मुख्यालय भिजवाई गई। मुख्यालय ने किशोर सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए। सूत्रों के अनुसार किशोर सिंह की भर्ती अस्थाई हुई थी। बाद में वर्ष 2005 में स्थायी कर दिया गया।

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