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फर्जी दस्तावेजों से की नौकरी, कार्रवाई नहीं

- कनिष्ठ लिपिक भर्ती 2013 में फर्जी दस्तावेजों से नियुक्ति का खेल— पंचायती राज विभाग में 8700 पदोें पर मिली थी नियुक्ति

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panchayati raj vibhag

panchayati raj vibhag

जयपुर। फर्जी डिप्लोमा व डिग्रियों के माध्यम से पंचायतीराज विभाग में पांच साल से हजारों कनिष्ठ लिपिको ने नौकरियां कर सरकार को करोड़ों रुपए की चपत लगा दी। अब विभाग के लिए इन अभ्यर्थियों की नौकरी गले की फांस बन चुकी है। विभाग भी मामले को लेकर चुपी साधे बैठा है। जिला परिषदों के अधिकारी तो उच्च अधिकारी से मामले को लेकर दिशा-निर्देश मांग रहे हैं, लेकिन फर्जी अभ्यर्थियों की संख्या अधिक होने के कारण एवं फर्जी दस्तावेजा के आधार पर नौकरी देने वाले अधिकारियों पर गाज गिरने की सम्भावना के चलते विभाग मार्ग दर्शन प्रदान करने को लेकर हाथ खींच रहा है।

क्या है मामला
2013 में महानरेगा योजना में कार्यरत संविदा कार्मिको को नियमित नियुक्ति प्रदान करने के लिए पंचायती राज विभाग ने बोनस अंक देते हुए 19537 कनिष्ठ लिपिक पदों पर भर्ती के लिए विज्ञप्ति जारी की थी। विभाग ने करीब 8700 पदों पर नियुक्तियां प्रदान की। कनिष्ठ लिपिक पद के लिए शैक्षणिक योग्यताओं के साथ-साथ विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से अधिकृत संस्थाओं से कम्प्यूटर डिग्री एवं डिप्लोमा होना आवश्यक था, लेकिन भर्ती के समय अभ्यर्थियों ने जो कम्प्यूटर डिग्री एवं डिप्लोमा प्रस्तुत किए वह यूजीसी के मापदंडों के अनुरूप नहीं थे।

यूं बने फर्जी डिग्री व डिप्लोमा
किसी भी डीम्ड, निजी एवं राज्य विश्वविद्यालय को उनकी राज्य की सीमाओं के बाहर ऑफ कैम्पस स्टडी सेंटर चलाए जाने की अनुमति नहीं है। इस संदर्भ में पंचायती राज विभाग ने 2013 एवं 2017-18 में यूजीसी एवं अतिरिक्त महाअधिवक्ता राजस्थान सरकार से मार्ग दर्शन प्राप्त करने पर बताया कि राज्यों की सीमाओं से बाहर ऑफ कैम्पस स्टडी सेंटर के माध्यम से दिए गए डिग्री एवं डिप्लोमा चयन के लिए मान्य नहीं है।

हनुमानगढ़ में बर्खास्त किए 18 कनिष्ठ लिपिक
मुख्यकार्यकारी अधिकारी जिला परिषद हनुमानगढ़ ने 13 सितम्बर 2017 को आदेश प्रसारित कर जिले की सात पंचायत समितियों मेंं सीएमजे विश्वविद्यालय मेघालय से प्राप्त किए कम्प्यूटर डिप्लोमाधारी चयनित एवं चार वर्षो से सेवारत अभ्यार्थियों को जांच कर सेवा से बर्खास्त कर दिया।

जांच करवाएंगे
मामले को लेकर जांच की जाएगी। दस्तावेजों का परिक्षण के उपरांत कार्रवाई की जाएगी। विभाग को इस बारे मेंं दिशा निर्देश जारी करने को लेकर कहा जाएगा। राजेन्द्र राठौड़, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री