21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजा-महाराजाओं की शान-शौकत बढ़ाता था बंद गले का ‘कोट‘, ऐसा रहा इसकी कामयाबी का सफर

इस रॉयल कोट को पहनने का 139 साल पहले शुरू हुआ सिलसिला आज भी बरकरार है...

2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Dinesh Saini

Dec 05, 2017

jodhpuri suite

जयपुर। संसार में किसी भी तरह का फैशन आया और गया, लेकिन बंद गले का जोधपुरी कोट तो आज भी फैशन की दुनिया का बेताज बादशाह बना हुआ है। राष्ट्रपति से लेकर आम आदमी की पहली पसंद इस कोट को जोधपुर के सर प्रताप ने 1878 में ईजाद किया था। ले.जनरल सर प्रताप जयपुर नरेश राम सिंह द्वितीय की राठौड़ी महारानी के भाई थे। मारवाड़ के अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी कॉक से अनबन के बाद वह जयपुर में रहने लगे। महारानी विक्टोरिया के शासन की हीरक जयंती समारोह में भाग लेने सर प्रताप 1878 में लंदन गए थे। वहां उनके कपड़ों का बक्सा जहाज से गुम हो गया। उन्होंने नए वस्त्र खरीदने के बजाय बाजार से कपड़ा मंगवा अपने हिसाब से बंद गले के कोट का डिजायन तैयार कर सिलवाया। उस कोट को पहनकर वे शाही समारोह में पंहुचे, तब साफे पर पहने कोट को लोगों ने खूब पसंद किया। इसके बाद बंद गले के कोट ने फैशन की दुनिया में तहलका मचा दिया।

139 साल पहले शुरू हुआ सिलसिला
देशी रियासतों के राजा महाराजा, सामंत व रईस लोगों की भी यह कोट खासा पसंद बन गया। इस रॉयल कोट को पहनने का 139 साल पहले शुरू हुआ सिलसिला आज भी बरकरार है। दूसरे विश्व युद्ध के समय सर प्रताप बंद गले का कोट पहने जहाज से पेरिस में उतरे तब उन्हें देखने अंग्रेजों का हजूम लग गया था।

बंद गले के कोट की सिलाई के लिए आज भी प्रसिद्ध हैं ये दुकाने
पर्यटन अधिकारी रहे गुलाब सिंह मीठड़ी के मुताबिक बीकानेर महाराजा गंगा सिंह व सर प्रताप कोट पहनकर लंदन गए थे, तब वहां पर कोट पहने फोटो छपे पोस्टकार्ड बिक रहे थे। 1955 में बदरीनारायण गोयल ने चौड़ा रास्ता में प्रेम प्रकाश सिनेमा हॉल के सामने बंद गले का कोट सिलने की दुकान खोली। केशव गोयल के मुताबिक उनके यहां राजपरिवार व सामंतों के कोट सिलते रहे हैं। जोधपुर महाराजा उम्मेद सिंह के निजी टेलर कुशाराम चौहान के बेटे शंकर लाल ने पोलो विक्ट्री के पास जोधपुर टेलर की दुकान खोली। जुगल चौहान ने बताया कि उनके यहां पर पोलो खिलाडिय़ों के अलावा महाराजा मानसिंह व पूर्व उपराष्ट्रपति भैरों सिंह शेखावत के कोट सिलते थे। 1961 में लंदन ट्रेंड कटर के जौहरी बाजार व मोती डूंगरी रोड पर मुन्नु खां कोट सिलते थे।

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भी था पसंद
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु एवं राजीव गांधी तथा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को भी बंद गले का कोट पसंद था। वहीं, राष्ट्रपति भवन व ब्यूरोक्रेट्स की औपचारिक वेशभूषा भी बंद गले का कोट बन गई। राजवीर सिंह डूंडलोद के मुताबिक कोट को ईजाद करने वाले सर प्रताप बरसों तक सवाई राम सिंह के पास जयपुर में रहे और प्रशासनिक व्यवस्था का अध्ययन किया। सर प्रताप जयपुर में त्रिपोलिया के आतिश दरवाजे की छत पर बने शाही महल में रहे। जयपुर रियासत के डीआईजी रहे किशोर सिंह खाचरियावास सर प्रताप के एडीसी थे। मानसिंह को गोद लेने में सर प्रताप की विशेष भूमिका रही।