
जॉनसन एण्ड जॉनसन को लगा तगड़ा झटका, देना पड़ सकता है सवा करोड़ रुपए तक का मुआवजा
विकास जैन / जयपुर. चिकित्सा विभाग ने जॉनसन एंड जॉनसन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से निर्मित दोषपूर्ण हिप इंप्लांट के 2010 से पहले किए गए प्रत्यारोपणों से प्रभावित मरीजों को मुआवजा देने के लिए राज्य स्तरीय कमेटी का गठन किया है। विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह ने बताया कि यह कमेटी प्राप्त आवेदनों की स्क्रीनिंग कर केन्द्र सरकार को रिपोर्ट भेजेगी और तय मापदंडों के आधार पर प्रभावितों के लिए 20 लाख रूपये से 1 करोड 25 लाख रूपए तक की मुआवजा राशि निर्धारित की जा सकेगी।
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों पर गठित की गई इस कमेटी में राज्य के औषधि नियंत्रक राजाराम शर्मा सदस्य सचिव होंगे। उल्लेखनीय है कि उस समय यह मैसर्स डिपॉय इंटरनेशनल लिमिटेड यूके (डिपॉय इंडिय) के नाम से थी। जिसे अब जॉनसन एंड जॉनसल प्राइवेट लिमिटेड के नाम से जाना जाता है। इसकी ओर से निर्मित दोषपूर्ण एएसआर हिप इंप्लांट के मामलों में मुआवजे के लिए दावा राज्य स्तरीय कमेटी के सदस्य सचिव के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
ये दस्तावेज करने होंगे प्रस्तुत
आवेदन में मरीज को निर्धारित प्रपत्र में विषय से संबंधित जानकारियां, पहचान संबंधी दस्तावेज, एएसआर हिप इंप्लांट का प्रकार प्रथम शल्य क्रिया और उसके बाद संशोधित शल्य क्रियाओं के बारे में अलग-अलग अस्पताल का नाम, सर्जन का नाम, अस्पताल या निर्माता से पूर्व में प्राप्त पुनर्भरण, मुआवजा प्राप्ति की सूचना, दोषपूर्ण इंपलांट के चिकित्सकीय लक्षण के दस्तावेज, अस्थाई, स्थाई दिव्यांगता प्रमाण पत्र, प्रयोगशसला से रासायनिक जांच रिपोर्ट अनुसार भुगतान एवं व्यवसाय, नौकरी छोडऩे आदि का प्रमाण, चिकित्सीय शल्य क्रिया कराए जाने वाले अस्पताल की डिस्चार्ज स्लिप जैसे संबंधित दस्तावेजों की जानकारी देनी होगी। राज्य स्तरीय कमेटी में शामिल ऑर्थोपेडिक सर्जन एवं रेडियोलोजिस्ट मरीज के दस्तावेजों का परीक्षण करेंगे।
Published on:
24 Apr 2019 07:35 pm
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