
जोजोबा के तेल में एंटीमाइक्रोबियल व एंटीफंगल प्रॉपर्टी के होने से इस तेल की काफी मांग है।
घटते भूजल स्तर पर युवा किसानों का नवाचार
-महावीर सारस्वत
बीकानेर जिले की श्रीडूंगरगढ़ तहसील में किसान कुंदनलाल सहू कम पानी में जोजोबा की खेती कर अच्छी आमदनी ले रहे हैं। इसके बीजों से तेल निकाला जाता है। जोजोबा की विदेशों में काफी मांग है।
पौधों के बीच ग्वार मोठ व मूंग की बुवाई
जोजोबा के पौधे शुष्क क्षेत्रीय होने के कारण इसके आसपास उगी खरपतवार का कोई असर नहीं होता है। ऐसे में किसान पौधों के बीच की खाली जगह में ग्वार, मोठ,मूंग जैसी फसलें बुवाई कर फायदा ले रहे हैं।
6 फसलों से 13 लाख की आमद
किसान को पिछले 5 सालों के दौरान 6 फसलों से 13 लाख रुपए की आय हो चुकी है। डेढ़ क्विटंल से शुरू हुई पैदावार 18 क्विटंल पहुंच चुकी है। गत वर्ष किसान को 6 लाख रुपए की आय हुई और हर साल बढऩे का अनुमान है। पौधरोपण व सिंचाई संसाधनों पर चार लाख रुपए की लागत आई थी। सब्सिडी के रूप में सरकार से डेढ़ लाख रुपए मिले थे। सौन्दर्य प्रसाधन कम्पनियां घर बैठे ही 30 से 35 हजार प्रति क्विटंल के भाव से पैदावार खरीद कर रही है।
16 बीघा जमीन पर लगाए 6 हजार पौधे
गर्म, शुष्क जलवायु, अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और थोड़ी सिंचाई से जोजोबा के पौधे आसानी से उग सकते हैं। किसान सहू ने 16 बीघा जमीन में 6 हजार जोजोबा के पौधे लगाए। उन्होंने नर्सरी से कटिंग से तैयार पौधों का रोपण किया। पौधे लगाने के लिए सितंबर सर्वोत्तम है।
Published on:
15 Sept 2022 04:23 pm
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