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Masik Kalashtami 2021 सभी प्रकार के भय दूर करते हैं भगवान भैरव, ऐसे प्राप्त करें इनका आशीर्वाद

कालभैरव जयंती के साथ ही हर महीने भी भैरव भगवान की पूजा—अर्चना का दिन आता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान शिव के रूप भगवान भैरव को समर्पित की गई है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर व्रत रखकर भैरवजी की पूजा—अर्चना करते हैं। इसे मासिक कालाष्टमी, शीतलाष्टमी या भैरवाष्टमी कहते हैं।

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Kalashtami Shitalashtami Bhairavasthami Masik Durgasthami 2021

Kalashtami Shitalashtami Bhairavasthami Masik Durgasthami 2021

जयपुर. कालभैरव जयंती के साथ ही हर महीने भी भैरव भगवान की पूजा—अर्चना का दिन आता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि भगवान शिव के रूप भगवान भैरव को समर्पित की गई है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर व्रत रखकर भैरवजी की पूजा—अर्चना करते हैं। इसे मासिक कालाष्टमी, शीतलाष्टमी या भैरवाष्टमी कहते हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि कालिका पुराण में भैरव को शिवजी का गण बताया गया है। कालभैरव का व्रत रखकर पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भैरव साधना करने वाले को समस्त प्रकार के भय से छुटकारा मिल जाता है। तंत्र साधना में भैरव के आठ स्वरूप की उपासना की बात कही गई है। इस दिन व्रत रखने वाले साधक को ॐ कालभैरवाय नम: का जाप करना चाहिए।

कालाष्टमी व्रत बहुत फलदायी माना जाता है। इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से काल भैरव की पूजा करने से सभी कष्ट खत्म हो जाते हैं। उससे काल तक दूर हो जाता है। कालाष्टमी व्रत करने वालों को हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है। कालभैरव की सवारी कुत्ता है अतः इस दिन कुत्ते को भोजन करवाना बहुत शुभ माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित नरेंद्र नागर के अनुसार कालाष्टमी के दिन मां दुर्गा की पूजा भी फलदायी है। नारद पुराण के अनुसार इस दिन अर्द्धरात्रि के बाद मां काली की उपासना करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। इस दिन रात को यथासंभव शिव—पार्वतीजी की कथा सुन कर जागरण का आयोजन करना चाहिए। व्रती को फलाहार ही करना चाहिए और ब्रहृमचर्य का पालन अवश्य करना चाहिए।

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