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राजस्थान की इस देवी से मिलती है कंगना को अन्याय के खिलाफ खड़े होने की शक्ति

kangna ranaut बनवाया है भव्य मंदिर

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Kangana Ranaut

Kangana Ranaut

जयपुर। बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत और महाराष्ट्र की शिवसेना के बीच शुरू हुआ विवाद अभी तक नहीं थमा है। एक ओर कंगना ने शिवसेना और मुंबई पुलिस को आड़े हाथों लिया, वहीं मुंबई में बीएमसी ने कंगना का करोड़ों का आॅफिस कबाड़ में तब्दील कर दिया। विवाद में अब कंगना की मां आशा रनौत ने भी शिवसेना के खिलाफ आवाज बुलंद की है। आशा रनौत ने शिवसेना के कार्यकर्ताओं से पूछा है कि क्या आपके घर में बेटियां नहीं हैं। साथ ही उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि उन्होंने अपनी बेटी को शास्त्रों के साथ ही शस्त्रों का ज्ञान भी दिया है। उन्हें गर्व है कि कंगना सच्चाई के साथ खड़ी हैं और सच बोलने की हिम्मत रखती हैं।

आपको बता दें कि फिल्मों में कई बोल्ड रोल निभा चुकी कंगना निजी जीवन में बेहद आस्तिक है। वे अकसर अपने सोशल मीडिया अकाउंट पूजा और हवन की तस्वीरें और वीडियोज शेयर करती हैं। इतना ही नहीं मुंबई आने से पहले भी वे मनाली में मंदिर में दर्शन करके रवाना हुई थीं। कंगना का कहना है कि उन्हें ईश्वर ही शक्ति देता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कंगना की कुलदेवी राजस्थान में हैं। जी हां, मेवाड़ के खजुराहो कहे जाने वाले जगत कस्बे के अम्बिका प्रासाद मंदिर में विराजित देवी अम्बिका को कंगना अपनी कुलदेवी मानती हैं।


उदयपुर से हिमाचल लेकर गईं मां की ज्योति

इतना ही नहीं कंगना यहां से मां की ज्योति को हिमाचल में मंडी के पास अपने पैतृक गांव धबोई लेकर गईं और वहां पर माता का भव्य मंदिर बनवाया है। उदयपुर के ही पंडितों ने इस मंदिर में कुलदेवी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवाई है। कंगना ने इस मंदिर का निर्माण साल 2019 में करवाया था। इसका निर्माण राजस्थान के लाल पत्थर से ही करवाया गया है। जानकारी के अनुसार कंगना साल 2018 में जगत के अम्बिका प्रासाद में मंदिर आई थीं और पूजा-पाठ करवाया था। वे देवी अम्बिका को अपनी कुलदेवी मानती है। बाद में उन्होंने धबोई में कुलदेवी मंदिर के निर्माण का निर्णय किया और विधि-विधान से शिलान्यास करवाया।


मां के सपने को किया पूरा

मंदिर के निर्माण को लेकर कंगना ने कहा था कि उन्होंने अपनी मां आशा रनौत का सपना पूरा किया है। उस समय कंगना ने बताया था कि उन्की माता जी को सालों से सपने में कन्या दिखाई देती थी। ब्राह्मणों के पास जाकर पता किया तो उन्होंने इसे कुलदेवी बताया। परिजनों को अपनी कुलदेवी का पता नहीं था, क्योंकि करीब डेढ़ सौ साल पहले कंगना के पूर्वज राजस्थान से मंडी आकर बस गए थे। मां ने बेटी को कुलदेवी का मंदिर ढूंढ़ने को कहा। और कंगना की तलाश अंबिका मंदिर आकर पूरी हुई।


1200 वर्ष पुराना है मंदिर

आपको बता दें कि जगत कस्बे को मेवाड़ का खजुराहो कहा जाता है। यहां बना देवी अंबिका का मंदिर की शिल्प कला बेहद खूबसूत है। यह मंदिर करीब 1200 साल पहले बनाया गया था।

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