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गुलाबी नगरी में बम भोले के जयकारे

सावन(Savan Somvar) में जहां पिछले कुछ दिनों से लगातार चल रही बारिश ने गुलाबीनगरी (Jaipur)को तरबतर कर दिया है, वहीं सावन के इस महीने में बम भोले के जयकारे(Bam Bhole Ka Jai Kara) भी न सिर्फ मंदिरों में बल्कि सड़कों पर भी सुनाई दे रहे हैं। सावने के दूसरे सोमवार यानि सोम प्रदोष शहर में कावड़ यात्राओं (Kanwar Yatra) का दौर चला।

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जयपुर

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Neeru Yadav

Jul 29, 2019

jaipur galtiji

गुलाबी नगरी में बम भोले के जयकारे

सावन (Savan Somvar) में जहां पिछले कुछ दिनों से लगातार चल रही बारिश ने गुलाबीनगरी (Jaipur)को तरबतर कर दिया है, वहीं सावन के इस महीने में बम भोले के जयकारे (Bam Bhole Ka Jai Kara)भी न सिर्फ मंदिरों में बल्कि सड़कों पर भी सुनाई दे रहे हैं। सावने के दूसरे सोमवार यानि सोम प्रदोष शहर में कावड़ यात्राओं (Kanwar Yatra)का दौर चला। इसके साथ ही कई जगहों पर कलश यात्राएं भी निकाली गईं। गलता स्नान करने के बाद कावड़ में जल लेकर भक्त रवाना हुए। गलता तीर्थ से अलसुबह से ही कावड़ यात्राओं का निकलना शुरू हो गया। कावड़ यात्रा के साथ महिलाएं कलश लेकर शामिल हुईं। इस बीच हर-हर महादेव, बोल बम ताडक़ बम के जयकारे गूंजते रहे। आज सोम प्रदोष होने से गलता स्नान के लिए लोग अलसुबह से उमड़े। गलता तीर्थ में रात से ही लोग पहुंचना शुरू हो गए। तडक़े गलता स्नान कर कावड में गलता जल लेकर कावडि़ए निकलने शुरू हो गए, गलता पीठाधीश्वर अवधेशाचार्य महाराज ने कई कावड़ यात्राओं के साथ निकली झांकियों की आरती की। कावडि़ए विभिन्न शिवालयों के लिए रवाना हुए। शिव मंदिरों में पहुंचकर कावड जल से शिवजी का जलाभिषेक किया। ताडक़ेश्वर महादेव मंदिर, झारखंड महादेव मंदिर सहित शहर की कई कॉलोनियों में स्थित शिवालयों के लिए भक्त कावड़ जल लेकर निकले और शिवजी का जलाभिषेक किया। श्रावण कृष्ण द्वादसी सोम-प्रदोष है इसी के साथ अमृतसिद्धि व सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग भी रहा। शिव मंदिरों में अलसुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ी। शिवालयों में दर्शन तडक़े 4 बजे से ही खुल गए। श्रद्धालुओं ने शिवजी के जलाभिषेक करने के बाद बिल्व पत्र, आक, धतुरा, भांग आदि अर्पित किए। शहर के झारखंड महादेव, ताडकेश्वर महादेव, जंगलेश्वर महादेव, सदाशिव ज्योतिर्लिगेश्वर महादेव, चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर सहित अन्य शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने वन सोमवार का व्रत रखा। उन्होने बाग-बगीचों में जाकर भोजन करके अपना व्रत खोला।