
नितिन कुमार (फोटो सोशल मीडिया)
जयपुर: विदेश से एमबीबीएस की डिग्री लेकर लौटने वाले छात्रों के लिए भारत में प्रैक्टिस करने से पहले फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) पास करना अनिवार्य होता है। लेकिन इस परीक्षा में लगातार असफल होने के बाद शार्टकट अपनाने वाले एक फर्जी डॉक्टर को राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान दिल्ली के शाहदरा निवासी 27 वर्षीय नितिन कुमार के रूप में हुई है।
SOG के अतिरिक्त महानिदेशक विशाल बंसल के अनुसार, आरोपी नितिन कुमार ने साल 2022 में कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी। भारत लौटने के बाद उसने नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) द्वारा आयोजित की जाने वाली FMGE स्क्रीनिंग परीक्षा कई बार दी, लेकिन वह हर बार फेल हो गया। बिना इस परीक्षा को पास किए भारत में डॉक्टरी का लाइसेंस या इंटर्नशिप की अनुमति मिलना नामुमकिन था।
परीक्षा पास करने में नाकाम रहने पर नितिन ने फर्जीवाड़े का रास्ता चुना। उसने दौसा निवासी बिचौलिए शुभम गुर्जर से संपर्क किया और 10 लाख रुपए देकर FMGE पास होने का एक फर्जी सर्टिफिकेट बनवा लिया। इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर उसने राजस्थान मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू की और राजकीय मेडिकल कॉलेज, करौली में इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर दिया। हद तो तब हो गई, जब उसने फर्जी कागजातों के दम पर करौली के सरकारी अस्पताल में अपनी मेडिकल इंटर्नशिप भी पूरी कर ली।
इस पूरे रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ, जब SOG ने बिचौलिए शुभम गुर्जर को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। शुभम से कड़ाई से की गई पूछताछ में नितिन कुमार का नाम सामने आया। तकनीकी साक्ष्यों और गोपनीय सूचनाओं के आधार पर SOG की टीम ने दिल्ली के शाहदरा में दबिश देकर नितिन को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल SOG उससे पूछताछ कर रही है।
SOG की जांच में सामने आया है कि यह कोई छिटपुट मामला नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा संगठित गिरोह है। फर्जी दस्तावेजों और सरकारी मिलीभगत के इस खेल में अब तक कुल 29 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पकड़े गए लोगों में शामिल हैं 24 फर्जी डॉक्टर, जिन्होंने विदेश से MBBS किया और फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के सहारे इंटर्नशिप और प्रैक्टिस हासिल की। राजस्थान मेडिकल काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा, यूडीसी अखिलेश माथुर और एलडीसी फरहान हसन। इस रैकेट का मुख्य सरगना भानाराम माली, उसका साथी शुभम गुर्जर और इंद्रराज गुर्जर हैं।
जांच में खुलासा हुआ है कि भाना राम माली और उसके सहयोगी FMGE परीक्षा में फेल होने वाले छात्रों को निशाना बनाते थे। आरोपी प्रति छात्र 20 से 30 लाख रुपए लेकर फर्जी सर्टिफिकेट तैयार करवाते थे और RMC अधिकारियों से मिलीभगत कर प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन और इंटर्नशिप अलॉट करवा देते थे। SOG ने अब तक ऐसे 100 से ज्यादा संदिग्ध डॉक्टरों को चिह्नित कर लिया है और आने वाले दिनों में कई और बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
Updated on:
28 Jul 2026, 8:19 AM IST
Published on:
28 Jul 2026, 8:19 AM IST
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