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तस्वीर उसकी रखें, जिसने बनाई तकदीर-मुनि पुलकसागर

ज्ञान गंगा महोत्सव में बही संस्कारों की भगीरथी,  मुनि पुलक सागर ने दिए प्रवचन, संत निवास से निकली शोभायात्रा में उमड़े श्रद्धालु

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Ashish Bajpai

Mar 14, 2016

मुनि पुलक सागर ने कहा कि पर्स, डायरी, मोबाइल के वॉलपेपर पर पत्नी, हीरो-हिरोइन की तस्वीर रखते हैं। कुछ लोग अपने आराध्य की तस्वीर लगाते हैं। लेकिन, इनकी तस्वीर नहीं रखो तो भी चलेगा। तस्वीर उसकी रखो, जिसने नौ माह तक गर्भ में पाला और संस्कारों की शिक्षा दी। जिस माता-पिता ने तकदीर बनाई है, उसकी तस्वीर हर घड़ी साथ रहनी चाहिए।
मुनि ने ये प्रवचन नया चिकित्सालय मार्ग पर दशहरा मैदान में चल रहे ज्ञान गंगा महोत्सव के दूसरे दिन सोमवार को दिए। उन्होंने कहा कि इस देश की वह संस्कृति है, जिसमें कहा जाता है 'प्रात:काल उठ रघुराई, मात-पिता शीश नमाई...Ó अर्थात तीन लोक के स्वामी भी जब धरती पर अवतरण लेते है, तो माता-पिता के चरणों का वंदन करते हैं। वहीं, राम सौतेली मां के वचनों पर राज-महल छोड़ कर वनवास भोगते हैं, लेकिन मां-पिता का तिरस्कार नहीं करते हैं। लेकिन, वर्तमान की पीढ़ी ने इन संस्कारों को जाने कहा छोड़ दिया है। जिस मां ने बोलना सीखाया। शब्दों का ज्ञान दिया। उन्हें ही संतान बोलने नहीं देती है। छोटे होने पर जिनकी ऊंगली पकड़ कर चलना सीखे, उन्हीं माता-पिता को पत्नी के लिए छोड़ कर चले जाता हैं। लेकिन, इस धरती पर मां-बाप से बड़ा न कोई है और नहीं कोईहोगा। मां-बाप का रिश्ता इस जग में सबसे बड़ा है। इसके बाद ही सभी रिश्ते बने हैं। भगवान कृष्ण देवकीनंदन, भगवान राम कौशल्यानन्दन और भगवान महावीर को त्रिशलानंदन कहकर बुलाते हैं। जब भगवान की पहचान माता-पिता से ही है, तो फिर सांसारिक मनुष्य की पहचान बिना माता-पिता के हो ही नहीं सकती है।
घर में जानवर के लिए जगह
मुनि ने कहा कि मनुष्य के पास टीवी-सोफे, कूलर, एसी, चपरासी सभी को रखने की घर में जगह है। इतना ही नहीं कुत्ते-बिल्लियों जैसे पालतू जानवरों तक के लिए अलग व्यवस्था है। लेकिन, बुढ़े और लाचार मां-बाप को रखने के लिए घर में जगह नहीं है। उन्हें वृद्धाश्रम में रख छोड़ा है। इस विडबना पर सोचने की जरूरत है। चिंतन करने की आवश्यकता है। यदि माता-पिता वृद्धाश्रम है और आंखे सजल है, तो समझ लेना कि तुहारा यश-वैभव और दान-पुण्य, धर्म-कर्म सब व्यर्थ है।
पहले श्रवणकुमार की पत्नी बनो
मुनि ने कहा कि चाहते हो कि मेरा बेटा श्रवणकुमार जैसा बने, तो सबसे पहले श्रवणकुमार की पत्नी बनने का दायित्व निभाना होगा। अपने पति के माता-पिता की सेवा करनी होगी। उनके गुस्से के कड़वे बोल सुनने पड़ेंगे। तभी संतान सुख देने वाली बनेगी।
ये भी पहुंचे
कथा में पूर्व सांसद ताराचंद भगोरा, सभापति केके गुप्ता, शंकरसिंह सोलंकी, प्रधान लक्ष्मण कोटेड, प्रेमकुमार पाटीदार, पुलिस अधीक्षक अनिल जैन, प्रेमचंद जैन, मूलचंद लोढा, लक्ष्मीलाल काका, पूनमचंद लबाना, रोशन दोसी आदि शामिल हुए।