
मातेश्वरी तनोटराय प्रांगण से जयपुर के लिए रवाना हुई ओरण बचाओ पैदल यात्रा शुक्रवार सुबह रामगढ़ पहुंची। आगमन पर ग्रामवासियों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सुमरसिंह के नेतृत्व में चल रही पैदल यात्रा के रामगढ़ पहुंचने पर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया।
इसके उपरांत तहसील कार्यालय के बाहर निजी कम्पनी के खिलाफ जारी धरने पर पहुंचकर ग्रामीणों का उत्साह बढ़ाने को सभा रखी गई।सभा को संबोधित करते हुए सुमरसिंह ने कहा कि हमारा समर्थन पूर्ण और स्पष्ट है। सरकार हमारे धैर्य की परीक्षा न ले। हमने जिस भूमि के संरक्षण के लिए बलिदान दिए हैं, उसे कंपनियों को सौंपकर मरुक्षेत्र की शांति को भंग न किया जाए। यदि सरकार जैसलमेर में ओरण-गोचर भूमि आरक्षित नहीं करती है तो गंभीर परिणाम होंगे। यात्रा में शामिल भोपालसिंह ने कहा कि जैसलमेर ने ओरण, गोचर, गोवंश और जल-स्रोतों के संरक्षण के नाम पर विश्वास जताकर सत्ता सौंपी है। यदि सरकार ओरण-गोचर, नदी-नाले और तालाब की भूमि आरक्षित नहीं करती है तो जनता पंचायती राज चुनाव में जवाब देगी।
यात्रा से जुड़े हरीश धनदेव ने कहा कि यह मुद्दा राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठ चुका है। मेरी प्रार्थना है कि तनोटराय माता यात्रा के दौरान मार्ग प्रशस्त करे और सरकार इस आवाज को जैसलमेर पहुंचने से पहले ही सुने। किशनगिरी गोस्वामी ने कहा कि सरकार चाहती है कि गांव सुनसान और सड़कें आबाद हों तो ग्रामीण इसके लिए भी तैयार हैं, परंतु ओरण-गोचर की रक्षा सर्वोपरि है।सभा के बाद ज्ञापन सौंपने के उपरांत ग्रामीणों ने एक स्वर में ओरण-गोचर बचाने का संकल्प लिया और पैदल यात्रा रामगढ़ से आगे प्रस्थान कर गई।
Published on:
23 Jan 2026 09:14 pm
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