
खिचड़ी खाते रहें बहुत फायदे हैं इसके
न्यूट्रिशन से भरपूर
आप भी खिचड़ी को देखकर नाक-भौं सिकोड़ते हैं तो ध्यान रखिए खिचड़ी केवल दाल और चावल का मिश्रण नहीं है, बल्कि इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, कैल्शियम, फाइबर, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और पोटेशियम भरपूत्र मात्रा में होता है। खिचड़ी में आप भरपूर सब्जियां भी मिला सकते हैं, जो इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू बढ़ाने के साथ स्वाद को भी दोगुना कर देती हैं।
पचाने में आसानी
आपने सोचा होगा कि आखिर बीमारी के बाद डॉक्टर खिचड़ी के लिए क्यों कहते हैं? सुपाच्य और हल्की होने की वजह से ही मरीज को खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है। खिचड़ी खाने से शरीर के विषाक्त भी साफ होते हैं। नरम और पौष्टिक होने की वजह से खिचड़ी बुजुर्ग के लिए फायदेमंद खाना है।
जोड़ों में फायदेमंद
खिचड़ी आर्थराइटिस को दूर करने में भी फायदेमंद होती है। दरअसल खिचड़ी बनाने में इस्तेमाल होने वाली हल्दी एंटीइंफ्लेमेट्री गुणों के लिए जानी जाती है। हल्दी में गठिया के दर्द से राहत दिलाने के लिए कई गुण होते हैं। हल्दी में शक्तिशाली औषधीय गुणों के साथ बायोएक्टिव कंपाउंड्स भी होते हैं जो एंटीऑक्सीडेंट क्षमता को बढ़ाते हैं।
दोषों में संतुलन
आयुर्वेदिक आहार का एक प्रमुख भोजन है खिचड़ी, क्योंकि इसमें तीन दोषों, वत्ता, पित्त और कफ को संतुलित करने की क्षमता होती है। शरीर को डीटॉक्सीफाई करने के अलावा खिचड़ी में ऊर्जा, प्रतिरक्षा और पाचन में सुधार के लिए आवश्यक बुनियादी तत्वों का सही संतुलन होता है।
हृद्य रोग में लाभप्रद
खिचड़ी हृद्य रोगियों के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है। खिचड़ी में मौजूद दालें पॉनीफेनॉल्स से भरपूर होती हैं, जो ब्लड प्रेशर को कम करने के साथ विभिन्न हृद्य रोगों से हमारा बचाव करती हैं। कई रिसर्च में ये सामने आया है कि व्यक्ति को दालें रोजाना खानी चाहिए, क्योंकि ये कोरोनरी आर्टरी डिजीज को कम करने की क्षमता रखती हैं।
आलस्य नहीं
खिचड़ी की खूबी है कि यह सुपाच्य भोजन होने के कारण फैट व आलस्य पैदा नहीं करती। यही वजह है कि धार्मिक लोगों के आहार में भी खिचड़ी प्राथमिकता से होती है। पर्याप्त प्रोटीन के साथ रक्त में शर्करा की स्थिरता बनाए रखने में सहायक खिचड़ी मन की शांति स्थिर बनाने में सहायक होती है।
वजन में कमी
खिचड़ी वजन घटाने में भी मददगार होती है। खिचड़ी खाने से वजन कम होता है। खिचड़ी में मौजूद दाल में फाइबर अधिक मात्रा में होता है, जो इंसुलिन के स्तर को कम रखने के लिए भोजन के पाचन को धीमा करने में मदद करता है। अगर आप वजन कम करना चाहते हैं तो खिचड़ी में सफेद की जगह ब्राउन चावल का इस्तेमाल करना चाहिए।
छोटे बच्चों के लिए
खिचड़ी छोटे बच्चों के लिए भी उपयोगी मानी जाती है। 10-11 महीने के बच्चों का मेटाबॉलिज्म बहुत कमजोर होता है और उनका पेट खाए गए खाने को ठीक से हजम भी नहीं कर पाता। ऐसे में बच्चों को खिचड़ी खिलाना अधिक फायदेमंद रहता है। खिचड़ी परिवार के सभी सदस्यों के लिए गुणकारी होती है।
Published on:
21 Oct 2019 01:50 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
