
देवेंद्र सिंह राठौड़
Organ Transplant : एसएमएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में भी फर्जी तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का मामला सामने आया है। यहां जिन एनओसी से ट्रांसप्लांट हुए, उनमें कमेटी सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर किए गए थे। सदस्यों में उनका नाम लिखा, जो कमेटी में थे ही नहीं। ऑपरेशन करने वाले चिकित्सकों ने एनओसी में अंकित इन नामों पर ध्यान ही नहीं दिया। इससे पूरी व्यवस्था पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रकरण के बाद यहां ट्रांसप्लांट नहीं हो रहे हैं।
फर्जी एनओसी का मामला उजागर होने के बाद गठित सरकार की मॉनिटरिंग कमेटी ने एसएमएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के इन मामलों पर गौर नहीं किया। बताया जा रहा है कि इसका रिकॉर्ड अब गायब है। खुद चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने एक दिन पहले ही कहा कि वर्ष 2020 के बाद कमेटी द्वारा एक भी एनओसी जारी होने का रेकॉर्ड नहीं मिला है। इसके बाद इस मामले में राजस्थान पत्रिका ने गहनता से पड़ताल की, जिसमें करीब आधा दर्जन एनओसी मिली हैं। ये एनओसी वर्ष 2023 में जारी की गई थीं। एनओसी के आधार पर ही एसएमएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में किडनी ट्रांसप्लांट किए गए।
एनओसी जिनकी ओर से जारी बताई, वे कमेटी में नहीं थे।
हैरानी की बात है कि ये एनओसी प्राचार्य कार्यालय में बैठक के बाद जारी होना बताया गया है। जबकि एनओसी पर प्राचार्य का नाम और हस्ताक्षर ही नहीं है। एनओसी में जिन सदस्यों के नाम हैं, वे वर्ष 2022-23 की राज्य स्तरीय कमेटी का हिस्सा भी नहीं थे। एक्ट के अनुसार एनओसी जारी करने वाली कमेटी में दो एनजीओ के सदस्य, सामाजिक सदस्य व राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी सदस्य का होना आवश्यक था, लेकिन वो भी नहीं थे। उनके बिना मीटिंग होना भी संभव नहीं था। यह भी सामने आया है कि दो-दो डॉक्टरों के हस्ताक्षर पर ही कई एनओसी जारी की गई हैं। बताया जा रहा है कि इस अस्पताल में अब तक 50 से ट्रांसप्लांट हो गए। जिनमें कुछ नॉन रिलेटिव हैं।
यों पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
राज्य स्तरीय कमेटी में राज्य सरकार के आदेश 1762, दिनांक 18 अप्रेल 2023 के अनुसार डॉ. राजीव बगरहट्टा को अध्यक्ष, डॉ. रामगोपाल यादव, डॉ. अनुराग धाकड़. भावना जगवानी (सामाजिक कार्यकर्ता), अपर्णा सहाय ( सामाजिक कार्यकर्ता), अधीक्षक एसएमएस अस्पताल, उप निदेशक (प्रशासन) राजमेस को सदस्य बनाया गया था। जबकि जिस एनओसी से एसएमएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में अक्टूबर 2023 तक ट्रांसप्लांट हुए उन पर डॉ. अचल शर्मा , डॉ. अजीत सिंह, डॉ. अंकुर व डॉ. अजय यादव के नाम के हस्ताक्षर मिले हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि एनओसी फर्जी बनाई गई है।
ट्रांसप्लांट करने वाली टीम पर भी उठ रहे सवाल
फर्जी एनओसी सामने आने के बाद ट्रांसप्लांट करने वाली टीम पर भी सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि टीम के सदस्य एनओसी पर गौर करते तो कमेटी के सदस्यों के नाम की हेराफेरी तो पकड़ सकते थे। सवाल उठता है कि क्या ट्रांसप्लांट टीम के सदस्य अपने अस्पताल के चिकित्सकों के हस्ताक्षर नहीं पहचानते?
न ट्रांसप्लांट लाइसेंस बनवाया न कमेटी
नियमानुसार एसएमएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए ट्रांसप्लांट लाइसेंस जरूरी है। लेकिन इस पर किसी ने गौर नहीं किया। लाइसेंस जरूरी इसलिए भी होता है कि कमेटी में ट्रांसप्लांट टीम के अलावा दो अन्य चिकित्सकों को सदस्य बनाया जाता है। एसएमएस अस्पताल के लाइसेंस पर ही एसएमएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं। जबकि सुपर स्पेशलिटी अस्पताल एसएमएस मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ऑटोनोमस सेंटर है। इनके अधीक्षक भी अलग-अलग है।
मुझे इस मामले में ज्यादा कुछ पता नहीं है। ट्रांसप्लांट का काम डॉ. धनंजय अग्रवाल ही देखते हैं, वो यूनिट हैड हैं। उनको इस मामले की पूरी जानकारी है। रही बात ट्रांसप्लांट लाइसेंस की, तो एसएमएस अस्पताल, सुपरस्पेशलिटी अस्पताल एक ही हैं। इधर-उधर आते जाते रहते हैं, इसलिए लाइसेंस की जरूरत नहीं।
ट्रांसप्लांट और एनओसी के संबंध में एसएमएस अस्पताल व मेडिकल कॉलेज से बात करो। इस संबंध में मैं कुछ नहीं कह पाऊंगा। फोन पर बात नहीं कर सकता।
-डॉ. धनंजय अग्रवाल, यूनिट हेड, नेफ्रोलॉजी विभाग, एसएमएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, वीसी, आरयूएचएस
Updated on:
17 May 2024 07:52 am
Published on:
17 May 2024 07:51 am
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