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लोगों की जान बचाने का इस शख्स पर है “खून” सवार, देखिए इसके लिए किस हद तक जाता है ये

लोगो की जान बचाने का इस शख्स पर है "खून" सवार, देखिए इसके लिए किस हद तक जाता है ये

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जयपुर

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Rajesh

Apr 29, 2018

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जयपुर

आज के समय में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी का फ़िक्र तक नहीं करते हैं। ऐसा ही एक शख्स नोएडा यूनिवर्सिटी का हैं, जो फिलहाल हज़ारों लोगों के लिए मिसाल बन चुका हैं। वैसे तो हमारे देश में समय पर खून न मिलने की वजह से न जानें कितने ही मासूमों की जान चली जाती हैं। ऐसा में नोएडा यूनिवर्सिटी का ये शख्स दूसरों को खून मिल सके इसके लिए वो खुद का पसीना बहा रहा हैं, ताकि दूसरों को समय पर खून मिल सकें।


अपना जीवन रक्तदान के लिए समर्पित कर चुके दिल्ली के 33 वर्षीय किरण वर्मा देश के सभी राज्यों में अब तक 15 हजार किलोमीटर की यात्रा करते हुए डेढ़ लाख लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित किया हैं। इनके बनाए सिंपली ब्लड नामक ऐप पर 182 देशों के 17500 रक्तदाता रजिस्टर्ड हैं और दो लाख से ज्यादा रक्तदाताओं का डेटाबेस है। जो अपने आसपास जरूरतमंद के लिए रक्तदान करके उनकी जिंदगियां बचाने का काम करते हैं।


देश- प्रदेश में लगातार हो रहें मौतों को देखते हुए किरण वर्मा ने एक पहल शुरू की हैं,उनका कहना है की इस ऑनलाइन मोबाइल ऐप के जरिए ब्‍लड डोनर को खोजा जा सकता है। वर्मा का कहना हैं की इस नई पहल की मदद से वो लोगों की तकलीफों को दूर करना चाहते हैं, और इस पहल में ज्यादा - ज्यादा लोगों को जोड़ना चाहते हैं, ताकि भविष्य में किसी भी मासूम या फिर किसी वेकती की मौत खून की कमी के चलते न हो।

सूत्रों के अनुसार किरण वर्मा इस ऐप की मदद से अब तक करीब 2000 से ज्यादा लोगों की जान बचा चुके हैं। वर्मा ने मीडिया से बात करने के दौरान बताया कि कई कई शहरों में ज्यादातर रक्त की कमी पाई जाती हैं, समय पर खून न मिलने के चलते उनकी मौत हो जाती हैं। जिसके बाद किरण वर्मा ने अवेयरनेस का ये जिम्बा उठाया हैं।

अब तक यहां-यहां फैला चुके हैं जागरूकता

श्रीनगर के लालचौक से 26 जनवरी को पैदल यात्रा शुरू करने वाले किरण वर्मा अब तक चंद्रकोट, उधमपुर, जम्मू, सांबा, पठानकोट, बटाला, अमृतसर, चंडीगढ़, पिंजौर, बडुग, समरहिल (शिमला), कालका, राजस्थान अंबाला,कुरुक्षेत्र, करनाल व रोहतक, जयपुर जैसे कई राज्यों में जा चुके हैं, और अपने इस अभियान के बारे में बता चुके हैं। प्रति किलोमीटर 10 लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य के साथ डेढ़ लाख लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करना इनका लक्ष्य है। बता दें कि इस पहल को शुरू करने के पीछे उनकी मां को खोने का दर्द छिपा हुआ हैं, उनकी मां कैंसर से पीड़ित थी।

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