
कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा। फाइल फोटो- पत्रिका
राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने अमानक उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी का उत्पादन, भण्डारण एवं विक्रय करने के खिलाफ वर्तमान कानून को और अधिक प्रभावी एवं सख्त बनाने के लिए केन्द्र सरकार को पत्र लिखा है। डॉ. मीणा ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस संबध में पत्र लिखकर यह आग्रह किया है।
उन्होंने पत्र में लिखा कि प्रधानमंत्री के किसानों की आय को दो गुना करने एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लक्ष्य की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि इस महती लक्ष्य की प्राप्ति के लिए किसानों को उच्च गुणवत्ता के आदानों (बीज, उर्वरक, कीटनाषी एवं सूक्ष्म पोषक तत्व आदि) की उपलब्धता सुनिष्चित किया जाना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री और आपके इस किसान हितैषी लक्ष्य की प्राप्ति के उद्देश्य के लिए गत दिनों उन्होंने अजमेर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र में संचालित उर्वरक विर्निमाण इकाइयों, श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिले में बीज निर्माताओं तथा जयपुर जिले में कीटनाशी निर्माण इकाइयोें का विभागीय अधिकारियों/निरीक्षकों के साथ सघन निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण में अधिकांश उर्वरक विर्निमाण इकाइयों पर गम्भीर अनियमितताएं मिलीं। इसमें मार्बल स्लरी का तथाकथित उर्वरक निर्माण में उपयोग, जिप्सम के स्थान पर मिट्टी का उर्वरक निर्माण में उपयोग, बिना लाइसेंस उर्वरक निर्माण इकाईयों का संचालन/भंडारण एवं बैग बदलकर किसी भी कंपनी का माल दिया जाना शामिल था। उन्होंने पत्र में लिखा कि गत 22 जून को कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड के 32000 बैग डीएपी श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ कस्बे में अवैध रूप अघोषित गोदाम में पाए गए।
इस अभियान के दौरान उवर्रक विनिर्माण इकाइयों डीलर, हेंडलिंग एवं ट्रांसपोर्ट एजेंट के विरूद्ध 28 एफआईआर दर्ज कराई गई है। उनके द्वारा उत्पादित/भंडारित उर्वरकों के 189 नमूने भी लिए गए हैं। अभी तक 57 नमूनों में से 56 नमूने अमानक पाए गए हैं।
प्रदेश में चार स्थानों पर सहकारी क्षेत्र की प्रमुख उर्वरक निर्माता इफको कंपनी के संदिग्ध माल का विर्निमाण अजमेर जिले के किशनगढ़ क्षेत्र में किया जा रहा था, जबकि इन इकाइयों के पास राजस्थान में इफको के सागारिका ब्रांड के निर्माण का कोई वैध लाईसेंस नहीं था। उत्पादित माल के बैगों पर निर्माण का स्थान नई दिल्ली एवं तमिलनाडु अंकित था।
इसी प्रकार श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ जिले में लगभग 20 बीज निर्माण इकाइयों का निरीक्षण किया गया। विनिर्माण इकाइयों की ओर से उत्पादित ऐसे अमानक उर्वरक, बीज एवं कीटनाशी को राजस्थान के अलावा देश के विभिन्न 16 से 20 राज्यों में बेचा जा रहा है।
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इन तथ्यों से ऐसा प्रतीत होता है कि किसान को अमानक आदानों की आपूर्ति किए जाने के कारण उनकी आय विपरीत रूप से प्रभावित हो रही है। साथ ही उसकी कृषि भूमि भी बंजर हो रही है, जो कि गम्भीर चिंता का विषय है। उन्होंने आगे लिखा कि ऐसी स्थिति में किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए अमानक उर्वरक बीज एवं कीटनाशी उत्पादन, भण्डारण एवं विक्रय के संबंध में वर्तमान कानून को ओर अधिक प्रभावी एवं सख्त बनाने की आवश्यकता है, जिससे किसानों के साथ हो रही धोखाधड़ी एवं लूट को रोका जा सके।
वहीं दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा सके, क्योंकि ऐसा कृत्य करने वाले कुछ व्यापारियों या दुकनदारों में वर्तमान कानून का कोई भय नहीं है। ऐसे लोगों के खिलाफ आम व्यापारी भी सख्त कार्रवाई चाहते हैं, जिससे उनकी साख को धक्का न लगे। डॉ. मीणा ने चौहान से आग्रह किया कि देश के विभिन्न राज्यों को इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश केन्द्र सरकार के स्तर से जारी किया जाना चाहिए।
Updated on:
25 Jun 2025 06:29 am
Published on:
25 Jun 2025 06:29 am
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