
Badrinarayan Temple In Jaipur
जयपुर। कहते हैं ब्रदीनाथ धाम के दर्शन मात्र से भक्तों की जीवन नैया पार लग जाती है। उत्तराखंड में स्थित भगवान बद्रीनाथ के कपाट भले ही आखातीज से छह महीने के लिए खुलते हो, लेकिन जयपुर के आमेर रोड, डूंगरी स्थित बद्रीनारायणजी के मंदिर के पट दर्शनों के लिए सालभर खुलते हैं। यहां सुबह—शाम मंदिर में आरती होती है। खास बात यह है कि आखातीज पर मंदिर से जोरावर सिंह गेट तक मेला भरता है और दर्शनों के लिए लम्बी कतारें लगती हैं। हालांकि कोरोना महामारी का असर बद्रीनारायण मंदिर पर भी नजर आया है। आखातीज पर मंदिर में धार्मिक आयोजन तो हुए लेकिन, लॉकडाउन के कारण पहली बार भक्तों के लिए भगवान के द्वार नहीं खुले। इसके कारण लोग अपने आराध्य के दर्शन नहीं कर पाए। भक्तों ने ऑनलाइन व सोशल मीडिया के जरिए ही अपने आराध्य के दर्शन किए। पहली बार अक्षय तृतीया पर मंदिर में चहुंओर सन्नाटा नजर आया।
आपको बता दें आमेर रोड डूंगरी स्थित प्राचीन मंदिर श्री बद्रीनारायणजी में अक्षय तृतीया महोत्सव इस बार सादगीपूर्वक मनाया गया। मध्यरात्रि में भगवान बद्रीनाथ का पंचामृत अभिषेक होने के बाद मंगला आरती से पहले नवीन पोशाक धारण करवा कर मनमोहक शृंगार किया गया। इस मौके पर भगवान को दाल, ककड़ी व मिश्री का प्रसाद अर्पित किया गया। शाम को श्री बद्रीनारायण की फूल बंगले की विशेष झांकी सजाई गई। लॉकडाउन के चलते इस बार आखातीज पर लगने वाला वार्षिक मेला नहीं भर सका। इस कारण मेले में स्टॉल लगाने वाले दुकानदारों को भी निराश होना पड़ा।
कहा जाता है आमेर स्थित डूंगरी पर बद्रीनारायण मंदिर का निर्माण 400 साल पहले संत माधोदास वैरागी ने कराया था। बद्रीनाथ मंदिर में भगवान की काले रंग की पाषाण की प्रतिमा स्थापित है। उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम की यात्रा कठिन होने से कई भक्त चाहकर भी आखातीज को नहीं जा पाते थे। बद्रीनाथ धाम साल में छह महीने बंद रहता है और आखातीज को खुलता है। ऐसे में जो भक्त वहां नहीं पहुंचता था वो आखातीज को इस मंदिर में आकर बद्रीनाथ भगवान के दर्शन कर लेते थे। यहीं कारण है कि बरसों से मंदिर में आखातीज पर विशेष आयोजन होते हैं।
Published on:
26 Apr 2020 06:26 pm
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